कोरबा। कोरबा जिले में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हुए हत्या के एक दोषी को पुलिस ने करीब छह साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। हैरानी की बात यह है कि फरारी के दौरान वह एक औद्योगिक संयंत्र की ठेका कंपनी में काम कर रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, मामला बालको थाना क्षेत्र के परसाभाठा का है। वर्ष 2007 में दरोगा कुर्मे अपने घर में मृत मिले थे। पुलिस जांच में उनके बेटों देवानंद कुर्मे और सूरज कुर्मे की संलिप्तता सामने आई थी। दोनों को हत्या, घर में घुसकर अपराध करने और साझा आपराधिक मंशा से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
आजीवन कारावास की सजा, फिर पैरोल पर हुए फरार
सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 12-12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों को बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया।
वर्ष 2020 में दोनों को पैरोल पर रिहाई मिली। उन्हें 7 अप्रैल को रिहा किया गया था और 1 मई तक जेल में वापस लौटना था, लेकिन तय समय पर उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गए।
ठेका कंपनी में कर रहा था काम
एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर एएसपी लखन पटले, सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी और थाना प्रभारी युवराज तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम फरार कैदियों की तलाश कर रही थी। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने देवानंद कुर्मे को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में देवानंद ने बताया कि पैरोल पर रिहा होने के बाद वह पहले बलीदा क्षेत्र स्थित अपने गांव गया और बाद में कोरबा लौटकर एक औद्योगिक संयंत्र के भीतर संचालित ठेका कंपनी में काम करने लगा। उसने नौकरी के लिए आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे।
दूसरे आरोपी की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार, फरार दूसरा दोषी सूरज कुर्मे अभी भी गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
फरार सजायाफ्ता कैदी का औद्योगिक संयंत्र में काम करना सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अब यह भी जांच का विषय है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि किए उसे संयंत्र में काम कैसे मिल गया।
