DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

कश्मीर में छत्तीसगढ़ के हिंदू मजदूरों की नाम पूछकर हत्या:लश्कर आतंकी लतीफ पर शक, अनंतनाग में कॉन्स्टेबल की हत्या में भी इसका नाम आया था

श्रीनगर/रायपुर। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों की हत्या आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने की है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। ये फ्रंट लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि इस वारदात को अंजाम आतंकी मोहम्मद लतीफ ने दिया है। इसी ने 22 जुलाई को अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की लाल चौक इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी।

शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम के केलाम में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी। पुलिस को यह जानकारी मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने दी। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।

ये हत्याएं पहलगाम जैसे पैटर्न पर की गई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसमें आतंकियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार दिया था।

लतीफ मोटरसाइकिल पर पहुंचा था

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लतीफ और उसका साथी मोटरसाइकिल पर प्रवासी मजदूरों के पास पहुंचा था। इन्होंने पहचान पत्र चेक किए और बहुत करीब से गोलीबारी की। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने 10-12 राउंड फायर की आवाज सुनी।

एजेंसियों के अनुसार, लतीफ ने यह हमला इसलिए किया, ताकि वह यह संदेश दे सके कि उसका मॉड्यूल अब भी एक्टिव है और आतंकी हमले करने में सक्षम है।

खुफिया सूत्रों का मानना है कि इस गोलीबारी की साजिश सीमा पार बैठे लश्कर के हैंडलर्स ने रची। शक मुख्य रूप से सज्जाद जट्ट / सैफुल्ला पर है, जो पाकिस्तान में रहने वाला जैश का सीनियर हैंडलर है।

बीते दो-तीन साल में कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर ऐसे ही आतंकी हमले हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने यहां CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। इस ईंट भट्ठे पर भी CCTV कैमरे लगे थे, जिसके फुटेज की पड़ताल की जा रही है। इस पूरे इलाके में 20 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं।

यह फोटो आतंकी मोहम्मद लतीफ की है।

आतंकी हमले के बाद के हालात, 3 तस्वीरें…

घायल मजदूर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से उसे श्रीनगर रैफर किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

शनिवार सुबह कुलगाम में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लोगों से पूछताछ की जा रही है।

पुलिस और सेना के जवानों की गाड़ियां पूरे इलाके की छानबीन कर रही हैं।

यूपी-बिहार समेत 6 राज्यों से आते हैं सबसे ज्यादा मजदूर

करीब 3–5 लाख प्रवासी मजदूर हर साल मौसमी या अस्थायी काम के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आते हैं। ये कंस्ट्रक्शन, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, बागवानी, कृषि, होटल-पर्यटन और छोटे उद्योगों में काम करते हैं।

Exit mobile version