नई दिल्ली,एजेंसी। संसद के शीतकालीन सत्र में गुरुवार को नौवें दिन की कार्यवाही जारी है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला को शिकायत करते हुए कहा- TMC सांसद सदन में ई-सिगरेट पी रहे हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि एक्शन लिया जाएगा।
विपक्ष के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पेंट की जेब हाथ डाले हुए ही जबाव दे रहे थे। इस पर स्पीकर बिरला ने उन्हें टोका और कहा कि माननीय सांसद जेब से हाथ निकालकर जबाव दें। इस पर हरदीपसिंह पुरी ने तत्काल हाथ बाहर निकाले।
इधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सुबह लोकसभा पहुंचे। जैसे ही वे कार उतरे तो कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उनसे मुलाकात की। रमेश ने ‘सरदार पटेल की इनसाइड स्टोरी: मणिबेन पटेल की डायरी’ नाम की किताब सौंपी। कहा- ये गुजराती में है, इसे पढ़िएगा।
राजनाथ ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘अंग्रेजी में दीजिए। मैं गुजराती नहीं जानता हूं।’ इतना कहकर राजनाथ सिंह आगे बढ़ गए। आज भी दोनों सदनों में चुनाव सुधार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर हंगामे के आसार हैं।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सदन के बाहर रक्षा मंत्री से मुलाकात की।
राहुल का शाह को डिबेट का चैलेंज
इससे पहले गुरुवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह को डिबेट के लिए चैलेंज कर दिया था। दरअसल इससे पहले दौरान शाह ने कहा था कि चुनाव सुधार पर चर्चा से बीजेपी के लोग भागते नहीं है। लोकसभा में दोनों के बीच इसपर तीखी बहस भी हुई। शाह ने राहुल गांधी के लोकसभा में पूछे 3 सवालों का जवाब भी दिया। इस दौरान सदन में 7 से ज्यादा बार हंगामा हुआ। आखिर में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया था।
नड्डा बोले- देश अनकंडीशनल सेंटीमेंट्स को ध्यान में रखकर चलता है
नड्डा बोले ने कहा कि देश अनकंडीशनल सेंटीमेंट्स को ध्यान में रखकर चलता है। वंदे मातरम् को वही सम्मान मिले, जो हम राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज को मिलता है।
कांग्रेस ने हर चीज कबूल की और कंप्रोमाइज किया
नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हर चीज को कबूल किया और कंप्रोमाइज किया है। वक्फ भी इसी का हिस्सा है। बॉम्बे प्रेसिडेंसी का विभाजन कर दिया। मुस्लिम लीग ने इसकी मांग की थी। बाकी लोग नहीं चाहते थे कि ये बंटे। 1947 में मुस्लिम लीग ने वंदे मारतम् का विरोध किया। कांग्रेस ने कबूल किया, अपने रेजोल्यूशन में। जिन्ना ने दो देश की बात कही। 1947 में कांग्रेस ने भारत को खंडित आजादी दिलाई।
नड्डा बोले- CWC ने कहा था- हमेशा पहले दो छंद ही गाए जाएं
संविधान की तीन प्रतियों पर हस्ताक्षर करने के लिए 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई। उसमें बिना किसी चर्चा और बिना किसी नोटिस के एक वक्तव्य पढ़ दिया गया, जिसमें भारत के राष्ट्रगान का निर्णय सुना दिया गया।
‘जन गण मन’ को भारत का राष्ट्रगान घोषित कर दिया गया और साथ ही यह भी कहा गया कि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान भी ‘जन गण मन’ के समान ही किया जाएगा।
यह निर्णय किस प्रकार संवैधानिक प्रक्रिया के तहत और लोकतांत्रिक निर्णय कहा जा सकता है, यह संविधान-निर्माताओं पर छोड़ा जाता है।
कलकत्ता कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 1937 तक हुई और उसने AICC के लिए एक प्रस्ताव पास किया।
इसमें कहा गया था कि कमेटी हमारे मुस्लिम दोस्तों द्वारा गाने के कुछ हिस्सों पर उठाई गई आपत्तियों को सही मानती है। कमेटी सलाह देती है कि जब भी राष्ट्रीय मौकों पर वंदे मातरम् गाया जाए, तो सिर्फ पहले दो छंद ही गाए जाएं।
