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1 अप्रैल को नम: सामूहिक विवाह:राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में 108 दिव्यांग/निर्धन कन्याएं बंधेंगी परिणय सूत्र में

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन की पुण्य पहल
कोरबा। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा प्रबंधन द्वारा 01 अप्रैल को ढपढप में चल रही श्रीहनुमंत कथा के पांच दिवसीय दिव्य आयोजन के पंचम एवं अंतिम दिन अपना घर सेवा आश्रम समिति के आयोजकत्व में दिव्यता और भव्यता के साथ सम्पन्न होगा। इस दिव्य आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका जहां मुख्य साक्षी बनेंगे, वहीं अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक एवं सनातन धर्म के संवाहक, बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आशीर्वाद प्राप्त होगा और इस पुण्य और सेवा कार्य के लिए उनका सानिध्य प्राप्त होगा।
पांच दिवसीय श्रीहनुमंत कथा से जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में हिन्दुत्व की जो विचार क्रांति की लहर ढपढप से चली है, उसका बड़ा संदेश आने वाले दिनों में दिखेगा। इस महान और पुण्य धार्मिक आयोजन के बीच 108 उन दिव्यांग और निर्धन कन्याओं का घर भी बसने जा रहा है और नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश के लिए पंडित धीरेंद्र शास्त्री का जहां सानिध्य मिलने से नम: सामूहिक की दिव्यता और बढ़ेगी और मा. राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ेगी। कार्यक्रम की विशालता और महानता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित केबिनेट के सदस्य एवं कई विधायक, राजनीतिज्ञ, लब्धप्रतिष्ठित समाजसेवक एवं विद्वतजनों की उपस्थिति इस पुण्य कर्म की गरिमा बढ़ाएंगे।
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन ने नम: सामूहिक विवाह को इस बार विशालता प्रदान करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है और अपना घर सेवा आश्रम के आयोजकत्व में ढपढप की पुण्यधरा इस महान पुण्य कर्म का साक्षी बनेगी।

पंडित शास्त्री के कार्यक्रम में पहली बार सामूहिक विवाह का आयोजन
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत सहित कई देशों में सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए कई दिव्य आयोजनों में अपने श्रीमुख से लोगों को हिन्दुत्व की महिमा बता रहे हैं। कोरबा की पुण्य धरा में उनका यह विशाल आयोजन पहली बार हो रहा है और आज हनुमंत कथा का दूसरा दिन है। विशाल समुद्र सा जनसैलाब उन्हें सुनने के लिए ढपढप की पुण्य धरा पर खड़ा रहा और सरल, सहज वाणी को सुनने एक अद्भूत और विशाल श्रद्धा देखने को मिली।
हनुमंत कथा 01 अप्रैल तक चलेगी और कथा के अंतिम दिन ढपढप में श्रद्धा, आध्यात्म के साथ मानवीय सेवा का अद्भूत संगम देखने को मिलेगा और वह क्षण काफी रोमांचित होगा, जब 108 निर्धन एवं दिव्यांग जोड़े एक-दूसरे के जीवनसाथी बनेंगे और जमीन से लेकर आसमां भी इस अद्भूत समागम में फूल बरसाएंगे।

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