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नानी बाई मायरो कथा में नरसी की हुंडी

सक्ती। वृंदावन की कथा व्यास अध्यात्म कथा प्रवक्ता दीदी राधा किशोरी के दूसरे दिवस के कथा प्रसंग में मुख्य जजमान संतोष अग्रवाल परिवार ने व्यास पीठ और सांवरा सेठ का मंगल पूजन किया। व्यास पीठ से आनंद आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद भक्तमाल पुराण की आरती हुई। दीदी राधा किशोरी ने शास्त्रोक्त मंत्रों से मंगलाचरण कर भगवान को नमन किया। भक्तों के साथ भाव भरा कीर्तन सुनाया।

कथा में नानी बाई मायरो प्रसंग चला। नानी बाई की ससुराल विदाई का करुण प्रसंग सुनाया गया। इसे सुनकर मातृ शक्ति और भक्तों की आंखें नम हो गईं। आगे विप्र की बेटी के विवाह का प्रसंग आया। नरसी ने अपना राग केदारा गिरवी रखकर 60 रुपए की व्यवस्था की। इसी से विप्र की बेटी का विवाह कराया। कुछ षड्यंत्रकारी लोगों ने नरसी के खिलाफ राजा को भड़काया। राजा ने नरसी के सामने शर्त रखी। कहा, केदार गाने पर अगर मंदिर का पुष्प हार उठकर तुम्हारे गले में आ गया तो ठीक। नहीं तो तुम्हें कपटाखंडी मानकर मार दिया जाएगा। कथा में बताया गया कि नरसी से यह शर्त निभाई नहीं जा सकती थी।

भगवान ने जिस सेठ से नरसी ने कर्ज लिया था, उसके पास नरसी के रूप में जाकर कर्ज चुका दिया। नरसी को केदारा राग गाने का अवसर मिला। दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियां प्यासी रे भजन भी हुआ। इसके साथ भगवान सांवरिया सेठ के रूप में आए। नरसी की हुंडी चुकाई। यहां नानी बाई के मायरा के लिए कुकू पत्री लिखी गई। भजन-झांकी के साथ हनुमान का उदाहरण भी दिया गया। अंतिम दृश्य में भगत के बस में है भगवान भजन भावभीनी प्रस्तुति के साथ सुनाया गया। श्याम बाबा की धमाल भजनों पर भक्ति हुई। अनगिनत माताएं-बहनें श्याम भजन धमाल में नाचती रहीं। आयोजकों ने बताया कि कल की कथा 3:30 बजे से 6:30 बजे तक होगी। पूर्णाहुति की कथा और मेरा मौसम की विशेष कथा वाचन किया जाएगा। श्याम मित्र मंडल ने सभी भक्तों का अभिवादन और धन्यवाद किया।

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