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भारतीय शिक्षा, राष्ट्र की सेवा और संस्कृति से जुड़ा नवाचार्य वर्ग, 22 ​स्कूलों ने की शिरकत

जांजगीर, एजेंसी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में ग्राम भारती सरस्वती शिक्षा विकास समिति द्वारा आयोजित दस दिवसीय नवाचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन 14 जून को शाम 6 बजे सरस्वती शिशु मंदिर, बिर्रा में हुआ। समापन समारोह सादगी, गरिमा और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण में जिले के 22 विद्यालयों से 7 आचार्य और 45 दीदियां शामिल हुईं। यह आयोजन शिक्षकों के वैचारिक, नैतिक और शारीरिक प्रशिक्षण का समग्र मंच बना। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और मां सरस्वती के चित्र पर पूजन और दीप प्रज्वलन से हुई। प्रशिक्षुओं ने सूर्यनमस्कार, संगठन खेल, समूह गायन, शारीरिक व्यायाम और सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।

अभ्यास वर्ग में अर्जित अनुशासन और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षकों ने भारतीय शिक्षण परंपरा को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय चरित्र निर्माण पर मार्गदर्शन दिया। समारोह में मुख्य वक्ता प्रांतीय सचिव, वनांचल शिक्षा सेवा न्यास, चंद्र किशोर श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक समाज का निर्माण करता है। शिक्षक के जीवन में मूल्य होंगे, तो उसकी कक्षा संस्कारशाला बन जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, वह भावी राष्ट्र का व्यक्तित्व गढ़ता है।

समन्वय व सहयोग की भावना भी बढ़ी विशिष्ट अतिथि घनश्याम तिवारी, सहायक नोडल अधिकारी, जिला सहकारी बैंक, ने कहा कि प्रशिक्षण एवं अभ्यास वर्ग न केवल कार्यपद्धति को सशक्त करते हैं, बल्कि शिक्षक वर्ग को परस्पर जोड़कर समन्वय एवं सहयोग की भावना भी बढ़ाते हैं। अध्यक्षता कर रहे जिला सचिव देवप्रसाद तिवारी ने बताया कि ग्राम भारती द्वारा संचालित 59 विद्यालयों में अध्ययनरत 11,925 छात्र-छात्राओं के लिए यह प्रशिक्षण उनकी दिशा और दशा तय करने वाला अवसर है।

प्रमाण पत्र वितरण हुआ समापन सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त सभी शिक्षकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। भारत माता की आरती, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की सामूहिक प्रस्तुति के साथ समारोह का समापन हुआ। उपस्थित अभिभावकों, ग्रामवासियों और अतिथियों ने कार्यक्रम की गरिमा और अनुशासन की मुक्तकंठ से सराहना की।

इनका रहा योगदान प्रशिक्षण के सफल संचालन में मनोज तिवारी (सेवानिवृत्त उच्च शिक्षक) वर्गाधिकारी के रूप में विशेष रूप से सक्रिय रहे। प्रमुख शिक्षकों में हीराराम सूर्यवंशी (कोसमंदा), मनीष सिंह (भैंसदा), राकेश कुम्भज (कुकदा), राम कुमार गढ़वाल (पाली), अनिल प्रकाश बघेल (पंतोरा) एवं बसंती साहू (तेंदूभाठा) का विशेष योगदान रहा। जिन्होंने बौद्धिक, मंच, चिकित्सा एवं शारीरिक अभ्यास विषयों का दायित्व कुशलता से निभाया।

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