बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य सरकार से हलफनामा मांगा है। 8 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी। 38 हजार में से 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित है।
वहीं, बिलासपुर में गंदगी और बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्ती दिखाई है। निगम आयुक्त को एक हफ्ते में काम पूरा करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

38 हजार आवेदन, 16 हजार से ज्यादा अब भी लंबित
शिक्षा का अधिकार (RTE) मामले में सुनवाई में सामने आया कि, कुल 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कई जिलों में सत्यापन की स्थिति बेहद खराब है। कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
लॉटरी प्रक्रिया पर भी संकट, सरकार से मांगा जवाब
कोर्ट ने कहा कि, 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इससे अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।
बिलासपुर की बदहाल व्यवस्था पर भी हाईकोर्ट सख्त
इसी के साथ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में गंदगी और अधूरी नाली निर्माण को लेकर भी सख्ती दिखाई। एक खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और अधिकारियों को फटकार लगाई।
अधूरी नाली और टूटी पाइपलाइन से बढ़ी परेशानी
मामला सिरगिट्टी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 (बन्नाक मोहल्ला) का है, जहां डेढ़ महीने से नाली निर्माण अधूरा पड़ा है। 10 फीट गहरी खुदाई के बाद काम रोक दिया गया, जिससे पानी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और जल आपूर्ति ठप हो गई। इलाके में गंदगी और जलभराव से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गंदगी से बीमारी का खतरा, कोर्ट ने जताई चिंता
अधूरी नाली में जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थानीय लोग गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया।
एक हफ्ते में काम पूरा करने का आदेश
हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर नाली निर्माण पूरा किया जाए, पाइपलाइन दुरुस्त कर जल आपूर्ति बहाल की जाए और पूरे क्षेत्र की सफाई व सैनिटाइजेशन किया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
अगली सुनवाई में देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
कोर्ट ने निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ की गई कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
