काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है।
बाढ़ के बाद सुरंग में 42 कर्मचारी और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। दो लोगों के जिंदा मिलने के बाद बचाव अभियान में उम्मीद बढ़ी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग में दाखिल हुईं और तलाशी अभियान तेज किया।
बाढ़ से अब तक 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
सुरंग में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…

चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है।
प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
पति को जिंदा देख पत्नी बोली- दूसरी जिंदगी मिल गई
कबीर महर्जन 25 अगस्त की सुबह त्रिशूली-3A में मेंटेनेंस के काम के लिए गए थे। रेस्क्यू के बाद उनकी पत्नी ने कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके पति को दूसरी जिंदगी मिल गई हो।
26 अगस्त को आई बाढ़ की घटना के बाद उनका फोन बंद हो गया। उस सुबह करीब 7:30 बजे पत्नी हीरा शोभा से कबीर की आखिरी बार बात हुई थी।
कई दिन तक कोई खबर नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती गई थी। अब कबीर के रेस्क्यू के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
संजय साह बोले – सबकी जान बचाना मेरी जिम्मेदारी थी
नेपाल में आई भीषण आपदा के 9 दिन बाद सुरंग से दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाला गया है। इनमें 30 साल के मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं।
आपदा के समय उन्होंने सुरंग से भागने के बजाय पहले अपने साथियों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, सबकी जान बचाना उनकी जिम्मेदारी थी।
संजय साह अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन में काम करते थे। उन्होंने बताया कि हादसे के समय वह सुरंग के कंट्रोल रूम में थे। आमतौर पर वहां 4 से 6 लोग रहते थे, लेकिन उस दिन करीब 40-45 लोग मौजूद हो सकते थे।
उन्होंने बताया कि अंधेरे में उम्मीद बनाए रखने के लिए वह मंत्रों का जाप करते रहे।संजय ने यह भी कहा कि कुछ लोग सुरंग के अंदर और गहराई में फंसे हो सकते हैं।
बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज घोषित
नेपाल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया है। बाढ़ में नष्ट वाहन, मशीनरी और उपकरण बिना कस्टम ड्यूटी के दोबारा आयात किए जा सकेंगे, जबकि प्रभावित लोगों के लोन की किस्तें आगे बढ़ाई या दोबारा तय की जाएंगी।
बीमा कंपनियों को तेजी से क्लेम निपटाने और शुरुआती आकलन के आधार पर 50% तक रकम एडवांस देने को कहा गया है।
बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की करीब 15 बस्तियां तबाह हुई हैं, इसलिए सरकार लोगों को बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर बसाने की तैयारी कर रही है।
शुरुआती आकलन में करीब 16 लाख लोग प्रभावित और 8,317 घर तबाह हुए हैं। रेस्क्यू किए गए करीब 3,948 लोग अस्थायी केंद्रों में रह रहे हैं। रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम भत्ता मिलेगा और ड्यूटी में मौत होने पर परिवार को 10 लाख नेपाली रुपए की मदद दी जाएगी।
नेपाल आपदा से जुड़ी तस्वीरें…
बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिजन, शव नहीं मिलने के कारण काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते नजर आए
बाढ़ में 43 वर्षीय दिनेश अच्छामे की मौत हो गई। शव बरामद नहीं होने के बाद काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार की रस्म के दौरान परिजनों ने उनका पुतला लेकर अंतिम विदाई दी।
नेपाल के रसुवा में अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और शवों को निकालने में बचावकर्मियों की टीम जुटी है।
भारतीय अधिकारियों ने काठमांडू के एयरपोर्ट पर नेपाली आधिकारियों को मदद सौंपी।
नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे 56 यात्रियों की मुंबई वापसी। गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे यात्री।
नेपाल बाढ़ में 600 बच्चे लापता, तलाश जारी
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। रसुवा में करीब 280, जबकि नुवाकोट में 300-350 बच्चों के लापता होने की जानकारी है। अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता बताए गए हैं।
प्रशासन और स्कूलों से बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सटीक संख्या जुटाने में दिक्कत आ रही है। कुछ बच्चों का पता चल चुका है, लेकिन अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की जानकारी भी सामने आ रही है। बाढ़ में दोनों जिलों के 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं।
एनवीडिया ने नेपाल बाढ़ राहत के लिए 1 करोड़ डॉलर दिए
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए) की सहायता दी है।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को मदद के लिए धन्यवाद दिया।
वागले के मुताबिक, इस सहायता के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हो चुके हैं।
UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे नेपाल PM
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं।
रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शाह ने पहले महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।
भारत की नई खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण
भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों से आई 21.5 टन सहायता में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।
26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री
भारत ने बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इसमें 10 टन सामग्री थी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण और DNA विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी।
2 सितंबर को भारत ने पांचवां विमान भेजा, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां थीं।
बाढ़ की वजहों की जांच में जुटे विशेषज्ञ
भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारणों की जांच कर रहे हैं।
इस बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। राहत और सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे धनराशि जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।
