नई दिल्ली, एजेंसी। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले के वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फिलिप नवरातिल ने बुधवार को खाद्य उत्पादों की लेबलिंग के नियमों को कड़ा करने के भारतीय खाद्य नियामक एफएसएसएआई के कदम का समर्थन किया। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनी के सीईओ नवरातिल ने कहा कि ग्राहकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे जिस खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहे हैं, उसमें क्या-क्या मिलाया गया है। उन्होंने कहा कि नेस्ले भारत में नियामकीय अनिवार्यता नहीं होने के बावजूद कैलोरी समेत सभी सामग्री की जानकारी देती है और कंपनी पारदर्शिता लाने के कदमों का समर्थन करती है।
नवरातिल ने एक मीडिया गोलमेज बैठक में कहा, ”हम चाहते हैं कि उपभोक्ता इस बात को लेकर जिज्ञासु हों कि वे क्या खाते और पीते हैं। हम हमेशा पारदर्शिता के पक्ष में रहे हैं।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कंपनियों के दावों और खुलासों की जांच हाल में तेज की है। नियामक ने भ्रामक विज्ञापनों, स्वास्थ्य संबंधी अप्रमाणित दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रमुख खाद्य एवं पेय कंपनियों को 150 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। इस पर नवरातिल ने कहा कि नेस्ले पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी देने के नियमों का भी स्वागत करेगी।
उन्होंने कहा कि कंपनी चीनी, वसा और सोडियम की मात्रा कम करके अपने उत्पादों के पोषण संबंधी प्रोफाइल में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों से उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी मिलेगी और वे अपने तथा अपने परिवार के लिए बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि, उन्होंने इस पर जोर दिया कि ऐसे नियम उचित और संतुलित तरीके से तथा वैज्ञानिक आधार पर लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण संबंधी जानकारी उत्पाद के कुल ग्राम के बजाय एक सामान्य हिस्से के आधार पर देना अधिक उपयुक्त हो सकता है, क्योंकि उपभोक्ता आमतौर पर उत्पाद का एक हिस्सा खाते हैं। सरकार के साथ सहयोग के बारे में पूछे जाने पर नवरातिल ने कहा कि यदि सरकार कंपनियों से सुझाव मांगती है तो नेस्ले अपने अनुभव और अन्य देशों के अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।
