मथुरा,एजेंसी। वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध Banke Bihari Temple में दर्शन व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। मंदिर में दर्शन के तरीके में बदलाव के फैसले के बाद गोस्वामी समाज के एक वर्ग ने हाई पावर कमेटी (HPC) के खिलाफ कड़ी नाराज़गी जताई है। देश और विदेश से आने वाले भक्तों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि ठाकुर जी की सेवा और सदियों पुरानी परंपराओं के प्रति कमेटी का रवैया अपमानजनक प्रतीत हो रहा है।

क्या है पूरा विवाद?
मंदिर के मुख्य सेवायत अनंत गोस्वामी जी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब ठाकुर जी के दर्शन गर्भगृह के बजाय जगमोहन से कराने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही गोस्वामियों के जजमानों को देहरी पूजन करने से भी रोकने की बात कही गई है। अनंत गोस्वामी जी का आरोप है कि कमेटी भक्तों और गोस्वामी समाज को देहरी पूजन से रोक रही है, जबकि कमेटी के सदस्य स्वयं पूजन करते दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि मंदिर प्रशासन बार-बार दोहरे मापदंड अपना रहा है। गोस्वामी समाज का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पारंपरिक तरीके से आने वाले जजमानों के दर्शन प्रभावित होंगे और VIP दर्शन व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
परंपरा बनाम नई व्यवस्था
प्रशासन का तर्क है कि बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ठाकुर जी को रोजाना जगमोहन में विराजमान कर दर्शन कराने की व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन गोस्वामी समाज का कहना है कि यह सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ है। परंपरा के अनुसार ठाकुर जी विशेष अवसरों और त्योहारों पर ही जगमोहन में दर्शन देते हैं, जबकि सामान्य दिनों में दर्शन गर्भगृह से ही होते हैं।
रेलिंग ठेका और अन्य विवाद
फरवरी 2026 में मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका एक मुस्लिम फर्म को मिलने पर भी साधु-संतों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। मंदिर प्रबंधन की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 1971 के बाद से बंद पड़ा मंदिर का तोशखाना (खजाना) अक्टूबर 2025 में खोला गया था, जिसमें कई पुरानी वस्तुओं और दस्तावेजों की जांच की गई। मंदिर के सेवायतों ने उत्तर प्रदेश सरकार के 2025 के नए ट्रस्ट अध्यादेश को Supreme Court of India में चुनौती दी है। इस अध्यादेश के तहत मंदिर के प्रबंधन को सरकारी ट्रस्ट के अंतर्गत लाने का प्रयास किया गया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय आने तक मंदिर का प्रबंधन एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली अंतरिम समिति को सौंप रखा है।
विदेशी भक्तों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन आने वाले कई विदेशी श्रद्धालुओं ने भी इस विवाद पर चिंता जताई है। कुछ विदेशी भक्तों का कहना है कि वे यहां की पारंपरिक झांकी दर्शन व्यवस्था और आध्यात्मिक माहौल से आकर्षित होकर आते हैं। उनका मानना है कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं को संरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि यही इसकी पहचान और आस्था का केंद्र है। Vrindavan में स्थित बांके बिहारी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना महान संत Swami Haridas ने की थी। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, इसलिए दर्शन व्यवस्था में किसी भी बदलाव को लेकर संवेदनशीलता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
