रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में दिसंबर शुरू होते ही लगभग सभी इलाकों में ठंड तेजी से बढ़ी है। मैनपाट में रात का पारा 4 डिग्री से नीचे चला गया है। यहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ बनने लगी हैं। इसी तरह अम्बिकापुर में 6-7°C, रायपुर में 12-13°C, और दुर्ग में 11-12 °C के आस-पास न्यूनतम तापमान चल रहा है। इन सभी जगहों पर पिछले तीन से चार दिनों में तापमान तीन से चार डिग्री तक गिरा है।
अगले दो से तीन दिन इस तापमान में कोई विशेष बदलाव होने की संभावना मौसम विभाग ने नहीं जताई है। हालांकि इसके बाद ठंड में कुछ कमी आ सकती है। स्थिति को देखते हुए लोकल प्रशासन भी अपनी ओर से एफर्ट कर रहा है। रायपुर में निगम ने कई जगह अलाव की व्यवस्था की है।
पिछले 24 घंटे की बात करें तो सबसे ज्यादा तापमान 27.8 °C जगदलपुर और सबसे कम न्यूनतम तापमान 07.4°C अंबिकापुर में दर्ज किया गया।
मौसम से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

मैनपाट में पैरावट में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई हैं।
सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा था।
वाड्रफनगर इलाके में कोहरे के कारण विजिबिलिटी घटकर 100 मीटर तक पहुंच गई थी।
पेंड्रा इलाके के गांवों और कस्बों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।
रायगढ़ में पिछले दो दिनों से बढ़ी ठंड
रायगढ़ जिले में तापमान में काफी गिरावट आई है। तापमान लगातार कम हो रहा है। 5 दिसंबर तक न्यूनतम तापमान 12.4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। आसमान में बादल छाए रहने के कारण दिन में भी हल्की ठंड महसूस हो रही है।
पिछले दो दिनों में ठंड बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण सुबह के समय काफी ठंड लग रही है, जबकि दोपहर की तेज धूप से थोड़ी राहत मिलती है। शाम को लोग ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहन रहे हैं। अलाव जला रहे हैं।
इसके अलावा, मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान और गिरने की उम्मीद है। न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
रात में लोगों को ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
रायपुर में नगर निगम ने कई जगहों पर अलाव का इंतजाम किया
रायपुर में शीतलहर का असर बढ़ते ही नगर निगम ने आम लोगों को राहत देने के लिए शहर में अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। निगम ने 12 से अधिक लोकेशन पर रातभर अलाव जलवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेघर, राहगीरों और आम नागरिकों को ठंड से तुरंत राहत मिल सके।
रायपुर नगर निगम की मेयर मीनल चौबे और कमिश्नर विश्वदीप के निर्देशों के बाद सभी जोन कमिश्नरों और जोन हेल्थ अधिकारियों से रात में फील्ड में रहने और अलाव के इंतजाम की निगरानी करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी की एडवाइजरी
इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।
मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है। वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।
डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी
डॉ जया बाजपेयी (MBBS DNB, मेडिसिन) बताया कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…
- शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
- स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
- घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
- पानी जमा न होने दें
- कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
- सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
- नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।
- शरीर को ढककर रखें
- खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
- बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
- समय पर जांच और इलाज कराएं
- यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
- मलेरिया फैलने का आधार
- तापमान 33-39°C (दिन में)
- तापमान 14-19°C (रात में)
- ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।
- 2 तरह के मलेरिया का खतरा
- प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
- प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।
- इन राज्यों में भी जोखिम
- पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
- गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले
