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गांव में मुक्तिधाम नहीं, टीन की छत बनाकर अंतिम संस्कार:जांजगीर-चांपा के बाना परसाही में 5 लाख स्वीकृत, अभी तक नहीं हुआ निर्माण

जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित आदिवासी बहुल गांव बाना परसाही में एक आदिवासी महिला का अंतिम संस्कार अस्थाई मुक्तिधाम में करना पड़ा। मुक्तिधाम न होने के कारण शव को पूरे दिन घर में रखा गया। आसमान साफ होने पर टीन की छत के नीचे पैरा का उपयोग कर अंतिम संस्कार किया गया।

यह इस क्षेत्र की पहली घटना नहीं है। बुचीहरदी में भी बरसात के मौसम में एक युवक का अंतिम संस्कार पन्नी तानकर किया गया था। इस घटना के बाद विधायक राघवेन्द्र सिंह ने मुक्तिधाम निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की थी।

स्थानीय प्रशासन को सभी गांवों में जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन आज भी कई गांवों में मुक्तिधाम की सुविधा नहीं है, जिससे लोगों को अंतिम संस्कार में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अस्थाई मुक्तिधाम बनाकर महिला का अंतिम संस्कार किया गया।

अस्थाई मुक्तिधाम बनाकर महिला का अंतिम संस्कार किया गया।

पहले भी हो चुकी है कई घटनाएं

इससे पहले भी इसी गांव में एक युवक का अंतिम संस्कार पन्नी तानकर करना पड़ा था। पिछले साल पोड़ी दल्हा गांव में एक महिला की मौत पर परिजनों को कीचड़ भरे खेतों से होकर मुक्तिधाम जाना पड़ा था।

इसके बाद एक अन्य मौत पर ग्रामीणों ने विरोध में सड़क पर शव रखकर चक्का जाम किया था। प्रशासन ने मुक्तिधाम बनाने की घोषणा की, लेकिन अतिक्रमण के कारण यह अब तक नहीं बन पाया है।

इस गांव में मनाया जाना था धरती आबा उत्सव

कुछ दिन पहले इस गांव में धरती आबा उत्सव मनाने का आदेश शासन की ओर से आया था लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा न जाने किन कारणों से धरती आबा उत्सव नहीं मनाया गया है लेकिन यह उत्सव कटघरी में मनाया गया।

कटघरी भी आदिवासी बहुल गांव है जहां शासन और प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे हुए थे। आज भी यह छोटा सा आदिवासी बहुल गांव छोटी छोटी सुविधाओं को तरस रहा है । बता दें कि धरती आबा शब्द झारखंड के महान आदित्य नेता बिरसा के लिए कहा जाता है।

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