मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी मिलाकर सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,380 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे 25 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
ब्रेंट क्रूड 2% से अधिक बढ़कर 111.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चा तेल करीब 50% महंगा हो चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। Nomura के विश्लेषक विनीत बांका के अनुसार, मौजूदा हालात में कंपनियों की बैलेंस शीट पर भारी दबाव है और लंबे समय तक नुकसान जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

तेल कंपनियों की हालत पर चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक….
- Indian Oil Corporation को लगभग 4 डॉलर प्रति बैरल का नुकसान
- Bharat Petroleum Corporation Limited को करीब 8 डॉलर प्रति बैरल का नुकसान
- Hindustan Petroleum Corporation Limited को लगभग 19 डॉलर प्रति बैरल का नुकसान
युद्ध से पहले ये कंपनियां प्रति बैरल 12–14 डॉलर का मुनाफा कमा रही थीं, लेकिन अब स्थिति उलट हो गई है।
कीमतें बढ़ीं लेकिन राहत नहीं
हाल ही में सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी घाटे को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है। Elara Capital के अनुसार, इस बढ़ोतरी से सालाना नुकसान में लगभग 34,500 करोड़ रुपए की कमी आ सकती है लेकिन यदि कच्चा तेल ऊंचा बना रहा तो और कीमत बढ़ाना या सरकारी सहायता जरूरी होगी।
