कोरबा। आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी, नवरात्रि के 9वें दिन देवीस्वरूपा कन्याओं को छप्पनभोग कराया गया। अष्टमी को कई उपासक कन्याभोज के साथ अपनी उपासना तोड़ते हैं और कन्याओं को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करते हैं। जिलेभर में कन्याभोज का आयोजन जगह-जगह, घर-घर किया गया।
कन्याओं को भोजन कराने के उपरांत उन्हें उपहार में श्रृंगार के सामान एवं कुछ नकद राशियां देने की परंपरा है, को निभाया गया। कन्याभोज से घर में अन्नपूर्णा, लक्ष्मी, सौभाग्य का निवास होता है, ऐसी मान्यता एवं विश्वास है। कन्याभोज से पूर्व कन्याओं का पग पखारा गया और उसके बाद उनके हाथ धुलवाए गए और छप्पनभोग परोसा गया। नौ कन्याओं के बीच एक बैगा को भी आमंत्रित किया गया था। कहीं-कहीं नौ कन्या, कहीं 21 कन्या तो कहीं बड़ी संख्या में कन्याभोज कराया गया।

