इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी अब सिर्फ 1.7% रह गई है। ब्रिटिश हिंदू संगठन इनसाइट यूके की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। 1941 में आज के पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 14.6% थी।
रिपोर्ट में हिंदुओं की आबादी घटने की वजह हिंसा और धर्म परिवर्तन बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंटवारे के समय और उसके बाद हजारों हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। कई परिवारों की पुश्तैनी जमीन और खेत भी छिन गए।
रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले भी उठाए गए हैं। संगठन ने ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
बंटवारे के बाद हिंदू परिवारों की जमीनें छीनीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 1947 के बंटवारे के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा के कारण हजारों हिंदू परिवार विस्थापित हुए। कई परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन और खेत खो दिए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के एनिमी प्रॉपर्टी कानूनों के तहत इन संपत्तियों पर कब्जे से हिंदू समुदाय की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई।
पाकिस्तान में एनिमी प्रॉपर्टी यानी दुश्मन की संपत्ति उन मकानों, जमीनों या दूसरी संपत्तियों को कहा जाता है, जिन्हें सरकार ने भारत चले गए लोगों या दुश्मन देश के नागरिकों की संपत्ति मानकर अपने कब्जे में ले लिया है।
हिंदुओं के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री बनने पर भी पाबंदी
रिपोर्ट में पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 का जिक्र किया गया है। इनके तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का पद केवल मुस्लिम नागरिकों के लिए है। इन नियमों को बदलने के लिए 2019 में लाया गया सुधार विधेयक आगे नहीं बढ़ सका।
संगठन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में पासपोर्ट बनवाते समय नागरिकों को अपना धर्म बताना पड़ता है। इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनाने की योजना भी अब तक पूरी नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में मंदिर निर्माण को मंजूरी मिलने के बाद इस्लामी संगठनों के विरोध के चलते काम रोक दिया गया था।

ब्रिटिश हिंदू संगठन इनसाइट यूके की रिपोर्ट की कवर फोटो।
हर साल 1,000 से ज्यादा हिंदू-ईसाई महिलाओं के अपहरण
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हर साल करीब 1,000 या इससे ज्यादा हिंदू और ईसाई महिलाओं व लड़कियों का अपहरण होता है। आरोप है कि बाद में उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अपहरण करने वालों से शादी करा दी जाती है। इनमें कई नाबालिग गरीब परिवारों से होती हैं। उन्हें न्याय पाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
हिंदू संगठन की ब्रिटेन सरकार से 5 मांगें
- मंदिरों की सुरक्षा और धार्मिक मामलों में जल्द सुनवाई के लिए समयसीमा तय की जाए।
- पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ा जाए।
- इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन में अल्पसंख्यक समुदायों के दो प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि हिंसा और भेदभाव के मामले सामने आ सकें।
- हिंदू, ईसाई, सिख और दूसरे अल्पसंख्यकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर हर छह महीने में रिपोर्ट जारी की जाए।
- जबरन धर्म परिवर्तन और धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए ब्रिटेन में शरण पाने के सुरक्षित रास्ते बनाए जाएं।
