इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान ने भारतीय संसद पर हमले के आरोपी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया है।
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने आतंकियों की नई रेड बुक में अजहर को एक बार फिर भगोड़ा घोषित किया है। यह कार्रवाई अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक से पहले की गई।
FIA ने अजहर को 2021 में भी भगोड़ा घोषित किया था और 50 लाख इनाम रखा था। मसूद अजहर भारत में संसद के अलावा 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा अटैक में भी आरोपी है।
FIA की रेड बुक में मसूद अजहर

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने मसूद अजर का नाम आतंकियों की रेड लिस्ट में रखा है।
कंधार विमान हाईजैक के बाद रिहा हुआ मसूद, जैश की स्थापना की
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड में बताया गया कि मसूद अजहर ने 1999 में भारतीय जेल से रिहा होने के बाद जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। JeM भारत के खिलाफ सक्रिय प्रमुख आतंकवादी संगठन बन गया।
24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस का काठमांडू से दिल्ली आ रहे विमान का अपहरण कर लिया गया। विमान को पहले अमृतसर, लाहौर, दुबई और कंधार पहुंचाया गया।
मसूद अजहर उस समय भारत की जेल में बंद था। वह हरकत-उल-अंसार से जुड़ा आतंकवादी था और 1994 में जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किया गया था।
कंधार पहुंचने के बाद हाईजैकर्स ने उसकी रिहाई की मांग की। भारत ने 31 दिसंबर 1999 को आतंकीि मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया। इनके बदले विमान में बंधक यात्रियों और क्रू को मुक्त कराया।
FATF की बैठक से मसूद पर कार्रवाई अहम, 3 पॉइंट
1. पाकिस्तान पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। इस दौरान उस पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था।
2. अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब अक्टूबर में FATF की बैठक होने वाली है। ऐसे में मसूद अजहर जैसे आतंकी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा पाकिस्तान के लिए अहम मानी जा रही है।
3. इससे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश कर सकता है कि वह आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ कदम उठा रहा है।
पाकिस्तान ने 2021 में कहा- मसूद अफगानिस्तान भागा
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है। संगठन को भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित किया है।
पाकिस्तान ने 2021 में दावा किया था कि मसूद अजहर उसके देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान भाग गया है। उसी साल FIA ने अपनी रेड बुक में उसे भगोड़ा बताते हुए 50 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
पाकिस्तान के बहावलपुर में मौलाना मसूद अजहर के घर के बाहर पहरा देता पुलिसकर्मी। यह तस्वीर 17 दिसंबर 2002 की है।
1994 में पहली बार भारत आया था मसूद अजहर
मसूद अजहर पहली बार 29 जनवरी, 1994 को बांग्लादेश से विमान में सवार होकर ढाका से दिल्ली पहुंचा था। 1994 में अजहर फर्जी पहचान बनाकर श्रीनगर में दाखिल हुआ था। उसका मकसद हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन गुटों के बीच तनाव कम करना था।
इस बीच भारत ने उसे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया था। तब अजहर ने कहा था- कश्मीर को आजाद कराने के लिए 12 देशों से इस्लाम के सैनिक आए हैं। हम आपकी कार्बाइन का जवाब रॉकेट लॉन्चर से देंगे।
इसके 4 साल बाद जुलाई 1995 में जम्मू-कश्मीर में 6 विदेशी टूरिस्ट्स को अगवा कर लिया गया। किडनैपर्स ने टूरिस्ट के बदले समूद अजहर को रिहा करने की मांग की। इस बीच अगस्त में दो टूरिस्ट किडनैपर्स की कैद से भागने में कामयाब हो गए। हालांकि, बाकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
ऑपरेशन सिंदूर में मसूद के परिवार के 10 सदस्य मारे गए थे
भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद 7 मई को पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। बहावलपुर पर भारतीय हमले में मसूद के परिवार के 10 लोग मारे गए थे। इसके अलावा 4 सहयोगियों की भी मौत हुई थी।
मरने वालों में मसूद की बड़ी बहन और उसका पति, मसूद का भतीजा और उसकी पत्नी, मसूद की एक भतीजी और उसके पांच बच्चे शामिल हैं। हमले के वक्त मसूद मौके पर नहीं था, इस वजह से उसकी जान बच गई थी।
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी मसूद ने परिवार के लोगों के मरने के बाद एक बयान भी जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि मैं भी मर जाता तो खुशनसीब होता।
