कोच्चि, एजेंसी। एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट में तकनीकी खराबी के कारण एक इंजन के सहारे कोच्चि लौटना पड़ा और यहां इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यह बोइंग 737 विमान अबू धाबी जा रहा था। करीब 50 मिनट की उड़ान के बाद पायलट ने इसके एक इंजन में ऑयल प्रेशर कम पाया। तब यह 36 हजार फीट की ऊंचाई पर था।
इंजन में ऑयल खतरनाक स्तर तक कम हो गया, तब दोनों पायलट ने इसे बंद करने का फैसला किया। वे एक इंजन सहारे ही कोच्चि लौटे।
चूंकि विमान ने करीब दो घंटे की ही उड़ान भरी थी इसलिए इसमें फ्यूल ज्यादा था। ऐसे में यह ओवरवेट लैंडिंग थी, जो और भी जोखिम भरी होती है।
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा- रिपोर्ट्स सही नहीं
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कहा, ‘एक हफ्ते पहले हमारी कोच्चि-अबू धाबी की एक फ्लाइट ने तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत वापस कोच्चि लौटने का फैसला किया था। इस घटना को सही समय और पूरे संदर्भ के बिना पेश करने वाली रिपोर्ट्स यात्रियों और आम लोगों के बीच अनावश्यक चिंता पैदा कर सकती हैं।’
पायलट ने पहले मुंबई से संपर्क साधा
एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ऑयल की मात्रा घटने के बाद ही क्रू ने अबु धाबी जाने की बजाय कोच्चि जाने का फैसला किया। कमांडर ने पहले इसकी जानकारी मुंबई ATC को दी और बताया कि विमान कोच्चि लौट रहा है।
एक इंजन खराब तो दूसरे से उड़ता है विमान
दो इंजन वाला कोई भी विमान इमरजेंसी में एक इंजन से भी उड़ सकता है। सिर्फ उसकी ताकत और ऊंचाई पर जाने की क्षमता कम हो जाती है। पायलट उसे एक ही इंजन से ऐसे एयरपोर्ट की ओर ले जाता है, जहां सुरक्षित लैंडिंग की जा सके।
ओवरवेट लैंडिंग से विमान को नुकसान हो सकता है
हर विमान के लिए एक अधिकतम लैंडिंग वजन तय होता है। सामान्य स्थिति में विमान को इससे ज्यादा वजन के साथ नहीं उतारा जाता। लेकिन इमरजेंसी में अगर तय सीमा से ज्यादा वजन के साथ उतारना पड़े, तो इसे ओवरवेट लैंडिंग कहते हैं।
विमान का वजन ज्यादा होने पर लैंडिंग स्पीड और लैंडिंग एनर्जी बढ़ सकती है। इससे ब्रेक और रनवे पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। ज्यादा लंबे रनवे की जरूरत हो सकती है।
लैंडिंग कितनी मुश्किल होगी, यह विमान की गति, रनवे की हालत, हवा की गति और ढलान पर भी निर्भर करता है। इसलिए ओवरवेट लैंडिंग के बाद विमान की जांच की जा सकती है कि उसे कोई नुकसान तो नहीं हुआ।
अब इसे ऐसे समझें
कोच्चि से अबू धाबी की हवाई दूरी करीब 2,800 किमी है। उड़ान में करीब 4 घंटे लगते हैं। विमान ने करीब 50 मिनट बाद 36 हजार फीट की ऊंचाई पर तकनीकी खराबी की वजह से लौटने का फैसला किया।
यानी विमान ने यात्रा का करीब एक चौथाई समय ही पूरा किया था। इस वजह से उसमें सामान्य उड़ान की तुलना में काफी ईंधन बचा हुआ था। यात्रियों और लगैज के साथ विमान में ईंधन का वजन भी शामिल होता है, इसलिए वापस लौटते समय उसका लैंडिंग वजन तय वजन से ज्यादा था। इसलिए इसे ओवरवेट लैंडिंग कहा गया।

फ्लाइटरडार24 का यह स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
3 सितंबर को भी फ्लाइट में तकनीकी खराबी आई थी
इससे पहले भी 3 सितंबर को वाराणसी से दिल्ली जा रही एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट को तकनीकी खराबी के कारण लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी।
सूत्रों के मुताबिक विमान के कार्गों में धुएं का अलार्म बजा था। पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट संपर्क किया। विमान के उतरते ही रिस्पॉन्स टीम ने मोर्चा संभाला। फायर बिग्रेड और टेक्निकल एक्सपर्ट भी मौके पर पहुंचे। विमान की जांच की गई।
