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PM मोदी ने तीजन बाई-विनोद कुमार शुक्ल को किया फोन:कहा-कुछ जरूरत हो तो बताइएगा, शुक्ल बोले- बस घर जाना चाहता हूं, लिखना चाहता हूं

रायपुर/दुर्ग,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोक गायिका तीजन बाई और कवि विनोद कुमार शुक्ल से बातचीत की है। पीएम मोदी 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर राजधानी रायपुर पहुंचे हैं। यहां पहुंचते ही पीएम ने दोनों से फोन पर बात कर हालचाल जाना।

बता दें कि तीजन बाई पिछले डेढ़ साल से बीमार हैं। उनका इलाज जारी है। वहीं, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल भी सांस की तकलीफ के कारण हॉस्पिटल में एडमिट हुए हैं। जिनसे बात कर पीएम ने कहा है कि कोई भी जरूरत होने पर वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने साहित्यकार शुक्ल से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? इसके जवाब में शुक्ल ने कहा- बस घर जाना चाहता हूं, लिखना चाहता हूं, क्योंकि लिखना मेरे लिए सांस की तरह है।

साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल सांस लेने में तकलीफ की वजह से रायपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट हैं।

साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल सांस लेने में तकलीफ की वजह से रायपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट हैं।

पीएम ने कहा- कुछ जरूरत हो तो बताइएगा

दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए विनोद कुमार शुक्ल के बेटे शाश्वत गोपाल ने बताया की सुबह साढ़े 9 बजे पीएम ने फोन किया था और पिताजी का हाल जाना। पीएम ने सीधे पिताजी से बात कर उनकी तबीयत की जानकारी ली। इस दौरान करीब एक से डेढ़ मिनट तक फोन पर उन्होंने बातचीत की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनोद कुमार शुक्ल से पूछा कि स्वास्थ्य कैसा है? तब शुक्ल ने बताया कि पहले से ठीक महसूस कर रहा हूं। पीएम ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं? विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि मैं बस घर जाना चाहता हूं और लिखना चाहता हूं, क्योंकि लिखना मेरे लिए सांस की तरह है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इलाज के लिए कुछ भी जरूरत हो तो बताइएगा।

हाल ही में मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार

छत्तीसगढ़ के रायपुर के रहने वाले हिंदी के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को इस साल ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया है। छत्तीसगढ़ से किसी साहित्यकार को पहली बार ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है।

शुक्ल पिछले 50 साल से लेखन कर रहे

दरअसल, 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल पिछले 50 साल से लेखन कर रहे हैं। विनोद कुमार शुक्ल की पहली कविता संग्रह ‘लगभग जय हिंद’ 1971 में प्रकाशित हुई थी। उनकी कहानी संग्रह पेड़ पर कमरा और महाविद्यालय भी बहुचर्चित है।

विनोद शुक्ल के उपन्यास नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी हिंदी के श्रेष्ठ उपन्यासों में शुमार हैं। उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ पर जाने-माने फिल्मकार मणिकौल ने एक फिल्म भी बनाई थी।

पद्मश्री और पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई पिछले डेढ़ साल से बिस्तर पर है।

पीएम बोले- तीजन बाई जी की कैसी है तबीयत

छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध गायिका, पद्मश्री और पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ली। 1 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने तीजन बाई की बहू वेणू देशमुख को फोन लगाकर उनका हालचाल पूछा। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने चिंता जताई और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

फोन पर नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अपना परिचय देते हुए कहा- नमस्कार वेणू जी, मैं देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं। तीजन बाई जी की तबीयत कैसी है? वेणू देशमुख ने बताया कि ‘मम्मी की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है, वे काफी कमजोर हो गई हैं।’ इस पर प्रधानमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि उनका ध्यान रखिए, और अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो सीधे मुझसे संपर्क कीजिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेणू देशमुख के बीच 1 मिनट 18 सेकेंड तक बातचीत हुई। वेणू ने बताया कि जब उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया कि मोदी जी उनसे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले यकीन नहीं हुआ।

“मैंने सोचा शायद कोई मजाक कर रहा है, लेकिन जब थोड़ी देर बाद प्रधानमंत्री खुद कॉल पर आए और बोले कि नमस्कार वेणु जी मैं देश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल रहा हूं’, तो मैं कुछ पल के लिए निशब्द रह गई। उनकी आवाज सुनकर ही विश्वास हुआ कि सचमुच देश के प्रधानमंत्री बात कर रहे हैं। इसके बाद मैंने उन्हें नमस्ते किया।

वेणू देशमुख ने बताया कि प्रधानमंत्री ने तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता दिखाई और कहा कि देश के लिए उन्होंने जो योगदान दिया है, वह अमूल्य है। तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की धरोहर हैं।

पंडवानी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस संवेदनशील पहल से पूरा कलात्मक जगत भावुक है। स्थानीय लोगों और कलाकारों ने भी उनकी इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकली तीजन बाई ने पंडवानी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है। वे कई दशकों से इस लोककला की पहचान बनी हुई हैं और देश-विदेश में सम्मानित हो चुकी हैं।

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