
नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी में नागरिकों से “वोकल फॉर लोकल” बनने, भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को बढ़ावा देने, स्थानीय कारीगरों का समर्थन करने और देश के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों को संरक्षित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये देश की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं और हजारों लोगों को आजीविका प्रदान करते हैं। आगामी राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अवसर भारत के बुनकर समुदाय के योगदान को पहचानने का मौका है।
7 अगस्त को मनाया जाएगा ‘राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस’
PM मोदी ने कहा, “कुछ ही दिनों में, 7 अगस्त को, हमारा देश ‘राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस’ मनाएगा। इस अवसर पर हम अपने बुनकर भाई-बहनों के कौशल और रचनात्मकता का जश्न मनाते हैं। हमारे ये साथी उन परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।” हैंडलूम उत्पादों के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हाथ से बुना हर कपड़ा किसी खास क्षेत्र और समुदाय की पहचान को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हैंडलूम का हर परिधान किसी खास क्षेत्र, समुदाय और उससे जुड़े अनगिनत लोगों की कहानी कहता है। ये वे लोग हैं जो गर्व के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए समर्पित हैं।” प्रधानमंत्री ने लोगों से हैंडलूम उत्पादों को प्रोत्साहित करने और सरकार की “वोकल फॉर लोकल” पहल को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने आगे कहा, “आज, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि हैंडलूम शिल्प को प्रोत्साहित करके हमारे बुनकर साथियों का सम्मान करें। आइए, ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को और मजबूत करें।”
हैंडलूम को बढ़ावा देने से लोगों की आजीविका में हुआ सुधार
PM मोदी ने यह भी बताया कि कैसे हैंडलूम को बढ़ावा देने से पूरे देश में लोगों की आजीविका में सुधार हुआ है। उन्होंने पोचमपल्ली, पटना, कुथम्पल्ली और कच्छ के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि कई व्यक्ति और समूह क्षेत्रीय बुनाई शैलियों को संरक्षित करके, पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देकर और विशेष रूप से महिला बुनकरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करके भारत की हैंडलूम परंपराओं को नई गति दे रहे हैं। खादी के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कपड़ा लगातार लोकप्रिय हो रहा है और महात्मा गांधी के विजन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “एक और विषय जिसका मैं खास तौर पर ज़िक्र करना चाहूंगा, वह है ‘खादी’। हम सभी जानते हैं कि ‘खादी’ महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थी। हाल के वर्षों में ‘खादी’ काफी लोकप्रिय हुई है। पिछले 12 वर्षों में इसकी बिक्री छह गुना बढ़ गई है। बिक्री का यह आंकड़ा अब लगभग 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।” उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे आने वाले त्योहारों के मौसम में स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें।
त्योहारों में जरुर खरीदें खादी या हस्तशिल्प से बनी कोई चीज
पीएम मोदी ने कहा, “मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आने वाले त्योहारों के मौसम में खादी, हथकरघा या हस्तशिल्प से बनी कम से कम एक चीज़ ज़रूर खरीदें।” प्रधानमंत्री ने भारत की समृद्ध संगीत विरासत के बारे में भी बात की और कहा कि देश में कई तरह के पारंपरिक वाद्ययंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपसे पूछा जाए कि भारत में कितने तरह के वाद्ययंत्र हैं, तो शायद आप सोच में पड़ जाएंगे! ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे पास वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़ी परंपराओं का एक विशाल भंडार है।”
त्रिपुरा के पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘चोंगप्रेन्ग’ का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आदिवासी समुदायों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। यह बांस से बना होता है और इसमें तीन तार होते हैं, जिससे सरोद जैसी मधुर आवाज़ निकलती है। उन्होंने कहा कि हालांकि युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता कम हो गई थी, लेकिन संगीतकार सूरज कुमार देबबर्मा ने चोंगप्रेन्ग और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ-साथ कोकबोरोक लोक गीतों, बाउल संगीत और बंगाली लोक संगीत के ज़रिए इस वाद्ययंत्र में लोगों की दिलचस्पी फिर से जगाने का काम किया है।
देबबर्मा की कोशिशों की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे देबबर्मा जी पर बहुत गर्व है; पारंपरिक संगीत को लोकप्रिय बनाने की उनकी कोशिशें वाकई तारीफ़ के काबिल हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप अपने आस-पास पाए जाने वाले पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करें। आपकी ऐसी कोशिशें निश्चित रूप से दूसरों को भारतीय पारंपरिक संगीत से जोड़ेंगी।” पीएम मोदी ने नागरिकों से ‘वोकल फॉर लोकल’ बनने का आग्रह किया; हैंडलूम और खादी को बढ़ावा दें – नई दिल्ली, 26 जुलाई (IANS) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी में नागरिकों से “वोकल फॉर लोकल” (स्थानीय उत्पादों के लिए मुखर) बनने, भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को बढ़ावा देने, स्थानीय कारीगरों का समर्थन करने और देश के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों को संरक्षित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये देश की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं और हजारों लोगों को आजीविका प्रदान करते हैं।
आगामी राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अवसर भारत के बुनकर समुदाय के योगदान को मान्यता देने का मौका है। पीएम मोदी ने कहा, “बस कुछ ही दिनों में, 7 अगस्त को, हमारा देश ‘राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस’ मनाएगा। इस अवसर पर हम अपने बुनकर भाई-बहनों के कौशल और रचनात्मकता का जश्न मनाते हैं। हमारे ये साथी उन परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।” हैंडलूम उत्पादों के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि हाथ से बुना हर कपड़ा किसी खास क्षेत्र की पहचान को दर्शाता है।