नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर किया गया था। इस दौरान पीएम मोदी गुजराती, हिंदी भजनों पर खंजरी बजाते और गुनगुनाते नजर आए।
‘भजन क्लबिंग’ युवाओं, विशेषकर जेन Z के बीच एक तेजी से उभरता हुआ अध्यात्मिक ट्रेंड है। यह पारंपरिक भजनों और कीर्तन को आधुनिक कॉन्सर्ट या नाइट-क्लब जैसी ‘वाइब’ और प्रोडक्शन के साथ प्रस्तुत करने का एक नया तरीका है।
भजन क्लबिंग के दौरान पीएम मोदी की तस्वीरें…
पीएम मोदी ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ भजन गुनगुनाते हुए नजर आए।

भजन क्लबिंग इवेंट के लिए पीएम मोदी भगवा जैकेट पहने पहुंचे थे।
पीएम के साथ बैठे युवा भी भजनों पर झूमते और नाचते नजर आए।
पीएम मोदी ने भजन क्लबिंग का ऑस्ट्रेलिया में किया था जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई में अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेलबर्न में भजन क्लबिंग ट्रेंड का जिक्र किया था। उन्होंने तारीफ की थी कि कैसे भारत की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और आस्था को आधुनिक जीवनशैली के साथ खूबसूरती से जोड़ रही है।
पीएम मोदी ने कहा था कि भजन क्लबिंग ट्रेंड को हमारी जेन-जी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। इससे पहले जनवरी 2026 में मन की बात कार्यक्रम में भी पीएम मोदी ने इस ट्रेंड की जमकर सराहना की थी।
जेन-Z के बीच मशहूर भजन क्लबिंग क्या है..
‘भजन क्लबिंग’ युवाओं, विशेषकर जेन Z के बीच एक तेजी से उभरता हुआ स्प्रिचुअल ट्रेंड है। यह पारंपरिक भजनों और कीर्तन को आधुनिक कॉन्सर्ट या नाइट-क्लब जैसी ‘वाइब’ और प्रोडक्शन के साथ प्रस्तुत करने का एक नया तरीका है।
इस ट्रेंड के कुछ खास फीचर…
- सात्विक माहौल: भले ही इसका नाम ‘क्लबिंग’ जैसा लगता है, लेकिन ये कार्यक्रम पूरी तरह से सात्विक होते हैं। यहां शराब या अन्य नशीले पदार्थों की कोई जगह नहीं होती।
- सामूहिक भागीदारी: यहां आए दर्शक केवल बैठकर सुनते नहीं हैं, बल्कि वे भी गाते हैं, ताली बजाते हैं, झूमते हैं और कीर्तन में हिस्सा लेते हैं।
- आधुनिक प्रस्तुति: पुराने समय के भजनों को मॉडर्न म्यूजिक, जैसे टेक्नो बीट्स या गिटार की धुन के साथ मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी उनसे जुड़ाव महसूस कर सके।
मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए जुड़ता है जेन Z
आध्यात्मिकता-आधुनिकता का संगम: युवा पीढ़ी परंपराओं से जुड़ना चाहती है, लेकिन वे इसे किसी पुराने या “बोरिंग” तरीके के बजाय अपने आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप अनुभव करना पसंद करते हैं।
मानसिक शांति और स्ट्रेस-रिलीफ: आजकल के तनावपूर्ण जीवन में, सामूहिक रूप से सकारात्मक संगीत सुनकर और गाकर लोग खुद को तरोताजा और तनावमुक्त महसूस करते हैं।
कम्युनिटी कनेक्शन: यह लोगों को एक साथ लाता है, जिससे उन्हें ‘बिलॉगिंग’ या अपनापन महसूस होता है।
कभी स्लैंग कभी रील्स, जेन-Z से ऐसे जुड़ रहे पीएम मोदी
- GRWM (गेट रेडी विद मी): उन्होंने पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों को प्रदर्शित करने के लिए सोशल मीडिया पर मशहूर ‘गेट रेडी विद मी’ फॉर्मेट का यूज किया।
- सेल्फी-स्टाइल रील्स: औपचारिक भाषणों की जगह सीधे कनेक्ट करते हुए सेल्फी-स्टाइल वीडियो या रील्स बना रहे हैं। जो ‘कैंडिड’ लगते हैं।
- जेन- Z की भाषा: अपनी स्पीच में भी वे जेन-जी की भाषा ‘फ्लेक्स’ और “OG” कर चुके है। रील्स में युवाओं को फ्रेंड्स कहकर संबोधित करते हैं।
भारतीय जनसंघ का प्रमुख चेहरा थे पंडित दीनदयाल, उनकी आज 110वीं जयंती
पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक राजनीतिक विचारक, अर्थशास्त्री और भारतीय जनसंघ के नेता थे। उन्होंने ‘राष्ट्र धर्म’, ‘पांचजन्य’ पत्रिकाओं और दैनिक समाचार पत्र ‘स्वदेश’ की शुरुआत की थी। एकात्म मानववाद, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता पर दीनदयाल जी के विचार आज भी बीजेपी के मिशन को दिशा दे रहे हैं।
25 सितंबर 1916 को जन्मे दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय राजनेता, ‘एकात्म मानववाद’ विचारधारा के समर्थक और भारतीय जनसंघ राजनीतिक पार्टी के नेता थे।
उपाध्याय ने 1940 के दशक में हिंदुत्व के पुनरुत्थान के आदर्शों को फैलाने के लिए ‘राष्ट्र धर्म’ नाम से एक मासिक पत्रिका शुरू की थी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और भारतीय जनसंघ (जो बाद में BJP बनी) के पूर्व नेता थे।
वे दिसंबर 1967 में जनसंघ के अध्यक्ष बने। 11 फरवरी 1968 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। उनका शव मुगलसराय जंक्शन के पास मिला था, जिसका नाम बदलकर अब दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया है।
