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RTE के तहत प्रवेश नहीं देंगे निजी स्कूल:54 हजार 824 छात्र होंगे प्रभावित, 6 हजार से ज्यादा स्कूलों ने एडमिशन देने से किया इनकार

रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश को लेकर निजी स्कूलों ने बड़ा फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने घोषणा की है कि इस साल वे RTE के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे। जिससे 54 हजार 824 छात्र प्रभावित होंगे।

संगठन का कहना है कि, लंबे समय से लंबित मांगों और शासन की अनदेखी के चलते यह निर्णय लेना पड़ा है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि आरटीई के तहत पिछले 14 साल से प्रतिपूर्ति की राशि नहीं बढ़ाए जाने की वजह से प्रदेश के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने फैसला लिया है।

6000 से ज्यादा स्कूलों पर असर

एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूल इस फैसले से प्रभावित होंगे। ये स्कूल RTE के तहत लॉटरी या ऑनलाइन माध्यम से चयनित छात्रों के एडमिशन की प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।

फीस प्रतिपूर्ति नहीं बढ़ने से नाराजगी

संगठन ने बताया कि वर्ष 2011 से RTE के तहत फीस प्रतिपूर्ति की राशि तय है, जिसे अब तक नहीं बढ़ाया गया है।

कक्षा 1 से 5 तक: रू.7000 प्रति छात्र

कक्षा 6 से 8 तक: रू.11,400 प्रति छात्र

कक्षा 9 से 12 (2018 से):रू.15,000 प्रति छात्र

संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद यह राशि वर्षों से जस की तस है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

हाईकोर्ट का भी लिया सहारा

एसोसिएशन ने बताया कि, इस मुद्दे को लेकर 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने 6 महीने के भीतर शासन को इस पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।

असहयोग आंदोलन का ऐलान

संगठन ने कहा कि, लगातार अनदेखी के कारण मार्च में ही असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया गया था। इसके तहत स्कूल शिक्षा विभाग के नोटिस और पत्रों का जवाब भी नहीं दिया जा रहा है।

गरीब छात्रों पर पड़ेगा असर

एसोसिएशन का कहना है कि, इस निर्णय का सीधा असर गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों पर पड़ेगा, जो RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि वे मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं, क्योंकि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं रह गया है।

सरकार से क्या मांग

निजी स्कूल प्रबंधन ने सरकार से मांग की है कि, फीस प्रतिपूर्ति राशि का पुनर्निर्धारण किया जाए। अन्य राज्यों की तरह व्यावहारिक दर तय की जाए। लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए। संगठन का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक RTE प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग संभव नहीं होगा।

54 हजार 824 सीटें प्रदेश में

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में आरटीई के तहत 54 हजार 824 सीटें प्रदेश में है। इन सीटों में कक्षा 1 से प्रवेश दिया जाता है। राज्य सरकार इन बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाती है।

आर.टी.ई. सीटों का निर्धारण यू-डाइस पोर्टल पर दर्ज गत वर्ष की कक्षा पहली की प्रविष्ट संख्या के आधार पर किया जा रहा है। इससे निजी शालाओं द्वारा नोडल अधिकारियों को दी जाने वाली गलत अथवा भ्रामक जानकारी पर अंकुश लगा है।

अब पढ़िए स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने क्या कहा

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि, आरटीई के तहत राशि ना बढाए जाने पर 1 मार्च से छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले संचालित सभी स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ असहयोग आंदोलन कर रहे है।

आरटीई की लॉटरी में जिन छात्रों का चयन होगा, उन्हें स्कूल प्रबंधन प्रवेश नहीं देगा। हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग आरटीई एडमिशन के तहत देने वाली फीस नहीं बढ़ा रहा। स्कूलों के असहयोग का कारण स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी है।

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