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रूसी संसदीय चुनाव में पुतिन समर्थक पार्टी जीती:यूक्रेन जंग के बाद पहला चुनाव, रूसी राष्ट्रपति के लिए बहुमत क्यों जरूरी

मॉस्को, एजेंसी। रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक यूनाइटेड रशिया पार्टी ने जीत हासिल कर ली है। शुरुआती नतीजों में पार्टी ने 57.5% वोट के साथ अजेय बढ़त बना ली है। चुनाव के आधिकारिक नतीजे अभी आने बाकी हैं।

यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। पुतिन ने चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन से जोड़कर पेश किया था।

2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटें जीती थीं।

स्टेट ड्यूमा रूस की संसद का निचला सदन है। इसमें कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी को मिले वोट के आधार पर और 225 सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में सीधे चुनाव से तय होती हैं।

तस्वीर रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा की है।

तस्वीर रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा की है।

यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी चुनाव से बाहर

रूस की युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को इस बार पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं को अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति मिली।

इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। रूस में इस चुनाव में 56.66% लोगों ने वोट डाला। मॉस्को में मतदान रिकॉर्ड स्तर पर रहा।

पुतिन ने सैनिकों के नाम पर वोट मांगा

चुनाव से पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लोगों से यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन में वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों का वोट सैनिकों के समर्थन को दिखाएगा।

पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदस्य नहीं

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदस्य नहीं हैं। हालांकि, वे 2008 से 2012 तक पार्टी के चेयरमैन रह चुके हैं। उस समय भी वे पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं थे।

यूनाइटेड रशिया के नियमों के मुताबिक, पार्टी का चेयरमैन होना जरूरी नहीं कि उसकी सदस्यता से जुड़ा हो। इसलिए पुतिन पार्टी के सदस्य बने बिना भी इसके चेयरमैन रहे।

2012 में पुतिन ने पार्टी चेयरमैन का पद छोड़ दिया। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव को पार्टी का चेयरमैन बनाया गया।

पुतिन ने खुद सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने यूनाइटेड रशिया की सदस्यता क्यों नहीं ली। इसलिए इसके पीछे किसी खास राजनीतिक रणनीति को वजह बताना सही नहीं होगा।

चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को पर यूक्रेन का ड्रोन हमला

रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को यूक्रेन ने मॉस्को और आसपास के इलाकों में 1,600 से ज्यादा ड्रोन भेजे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हुई। इनमें एक 44 साल की महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं।

मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, हमले में राजधानी की एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा है। रिफाइनरी में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।

एक ड्रोन 21 मंजिला अपार्टमेंट से टकरा गया, जिससे इमारत में आग लग गई। इसके बाद करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें 70 बच्चे भी शामिल थे

मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी में लगी आग से उठता धुआं। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले में रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा।

मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी में लगी आग से उठता धुआं। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले में रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा।

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