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आरती स्पंज खदान का विरोध, 2 हजार ग्रामीण जुटे:दंतेवाड़ा में 55km पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, खनन-परिवहन के रिकॉर्ड की जांच की मांग

दंतेवाड़ा,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के आलनार स्थित लौह अयस्क खदान का ग्रामीणों ने विरोध किया है। बस्तरिया राज मोर्चा के नेतृत्व में गुरुवार को 2 हजार आदिवासी ग्रामीण 55 किलोमीटर पैदल यात्रा कर दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।

आलनार के ग्रामीणों का आरोप है कि आरती स्पंज कंपनी ने सरकारी रिकॉर्ड में जो 2.75 लाख टन लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन दिखाया है, ये गलत है, कंपनी अन्य स्रोतों से मिले लौह अयस्क को खदान के नाम पर वैध कर रही है।

ग्रामीणों ने सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर खनन की जांच और दोषी पाए जाने पर खदान की लीज रद्द करने की मांग की है। कलेक्टर ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है। वहीं, कंपनी मैनेजर ने नियमों के मुताबिक उत्पादन और परिवहन की बात कही है।

पूर्व विधायक ने उठाए सवाल

ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधायक मनीष कुंजाम भी शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी का 2.75 लाख टन लौह अयस्क के खनन और परिवहन का दावा झूठा है। जिन गाड़ियों और ड्राइवरों के नाम परिवहन रिकॉर्ड में दर्ज हैं, उनमें से कई लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खदान क्षेत्र में न तो बड़े पैमाने पर खनन के स्पष्ट निशान दिखाई दिए हैं और न ही भारी गाड़ियों की नियमित आवाजाही हुई है। ऐसे में लाखों टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन के दावों की जांच होनी चाहिए।

2.75 लाख टन लौह अयस्क खनन का दावा

दंतेवाड़ा जिले में आलनार इलाके का तरल पहाड़ सरकार ने रायपुर की आरती स्पंज कंपनी को लीज पर दिया है। कंपनी का दावा है कि 9 साल में उसने यहां से 2.75 लाख टन लौह अयस्क का खनन किया है। 5 ट्रकों के जरिए इनका परिवहन हुआ है। यही नहीं, सबूत के तौर पर रॉयल्टी पर्चियां भी कटवाई गई हैं।

अलग-अलग ट्रकों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज

आरती स्पंज के दस्तावेजों के अनुसार, पिछले महीने 5 ट्रकों के माध्यम से लौह अयस्क परिवहन हुआ है। इनमें 4 ट्रकों के ड्राइवरों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। वाहन मालिक के रूप में केवल एक नाम, अब्दुल वाहिद का जिक्र है। जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग ट्रकों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज है।

तख्ती पकड़कर महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।

डंपिंग यार्ड भी जांच के घेरे में

आंदोलनकारियों ने दंतेवाड़ा के कारली स्थित कंपनी के डंपिंग यार्ड को लेकर भी सवाल उठाया हैं। उनका दावा है कि यार्ड में पड़ा लौह अयस्क का चूरा सालों पुराना है। उसकी गुणवत्ता भी खदान क्षेत्र में मिलने वाले अयस्क से अलग है। इससे संदेह है कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और जमीनी स्थिति एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहीं।

जानकार बताते हैं कि आलनार क्षेत्र अयस्क पाया जाता है। यार्ड में दिखाई देने वाला महीन लौह अयस्क डस्ट या क्रश्ड मटेरियल अलग प्रकृति का है। दंतेवाड़ा के कलेक्टर देवेश ध्रुव ने कहा, मामले की जांच के बाद जैसी बातें सामने आएंगी, उसी हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कंपनी बोली- नियमानुसार ही अपना काम कर रहे

आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड के मैनेजर ईएस ठाकुर ने कंपनी का पक्ष रखते हुए कहा कि कुछ पेड़ गलती से कटे हो सकते हैं। अगर ऐसा है तो कंपनी नियमानुसार पेनाल्टी भरने को तैयार हैं। लौह अयस्क का नाले के पास से परिवहन किया जा रहा था।

2017 में क्षेत्रीय परिस्थितियों के चलते कंपनी सीमित मात्रा में ही लौह अयस्क निकाल पाई थी। प्रभावित गांवों के साथ हुए एमओयू की निगरानी के लिए समिति बनी है। 2025 में ग्राम सभा हुई थी। मौजूदा आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों की भागीदारी नहीं है। शासन ने नियमानुसार कंपनी को लीज दी है और कंपनी भी नियमानुसार ही अपना कार्य कर रही है।

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