DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

JPL कोल खदान के विरोध में 14 गांवों का प्रदर्शन:5 दिन से धरना-प्रदर्शन,ग्रामीण बोले-नहीं देंगे जमीन,सरगुजा में बवाल-पथराव, कोरबा में CISF ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

रायगढ़,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में कोल माइंस को लेकर लगातार विरोध जारी है। इसी बीच रायगढ़ के तमनार ब्लॉक के 14 गांव के ग्रामीणों ने जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की प्रस्तावित कोल माइंस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रही।

जानकारी के मुताबिक, ग्रामीणों के समर्थन में लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं। विधायक ने भी ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की। जनसुनवाई के लिए टेंट न लगने देने के उद्देश्य से मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया।

इसके पहले कोरबा में गेवरा खदान में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। CISF ने लाठीचार्ज किया। इसमें 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं रायगढ़ के छाल क्षेत्र में भी 300 ग्रामीणों ने जनसुनवाई रद्द करने की मांग की। इसके अलावा सरगुजा के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के खिलाफ ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया।

इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया। हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए ​थे। वहीं पुलिसकर्मियों ने भी ग्रामीणों पर पत्थर से हमला किया।

रायगढ़ में क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन ?

दरअसल, रायगढ़ के तमनार ब्लॉक में कोल खदान के लिए JPL को जमीन प्रस्तावित है, लेकिन ग्रामीण कोल खदान के खिलाफ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खदान से उन्हें विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट का खतरा है।

उनका कहना है कि तमनार और आसपास का इलाका पहले से ही कंपनियों के कारण प्रदूषण की चपेट में है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। जल-जंगल-जमीन भी तेजी से नष्ट हो रहे हैं। प्रस्तावित कोयला खदान का हर हाल में विरोध करेंगे।

रायगढ़ में प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही।

5 दिसंबर से ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े

तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित गारे-पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर-1 की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। 5 दिसंबर से ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस आंदोलन में लगभग 14 गांवों के लोग शामिल हैं। ग्रामीण धौराभांठा स्कूल मैदान में धरने पर बैठे हैं।

इनमें झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल सहित अन्य गांवों के लोग भी शामिल हैं। ग्रामीण किसी भी नई कंपनी या कोयला खदान को इस क्षेत्र में शुरू नहीं होने देना चाहते हैं।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रोड पर बैरिकेडिंग की थी।

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं विधायक विद्यावती सिदार

वहीं कोयला खदान के खिलाफ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबर मिलते ही लैलूंगा से कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया। जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की।

गांव वालों का आरोप है कि पब्लिक हियरिंग के लिए स्कूल का मैदान तय जगह थी, लेकिन वहां करने के बजाय सुनवाई चुपके से मार्केट कॉम्प्लेक्स के अंदर एक कमरे में की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे, लेकिन अब वे चले गए हैं। हालांकि, गांव वाले अभी भी स्कूल के मैदान में जमा हैं।

कोल खदान के खिलाफ 14 गांव की महिलाएं विरोध प्रदर्शन में शामिल।

कोल खदान के खिलाफ 14 गांव की महिलाएं विरोध प्रदर्शन में शामिल।

ग्रामीण बोले- हम नहीं देंगे अपनी जमीन

विरोध प्रदर्शन में मौजूद जानकी चौहान ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। अमरवती सिदार ने कहा कि वे 5 नवंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जनसुनवाई को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। जब तक निरस्त नहीं करेंगे, हम विरोध प्रदर्शन करेंगे।

ग्रामीण महिला सेत कुमारी चौहान ने कहा कि उन्होंने बाहरी लोगों को अंदर आने से रोकने के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी है। वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ना चाहते। 14 गांवों के सभी पुरुष और महिलाएं विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।

ग्राम सभा की सहमति के बिना कलेक्टर गांव में घुसे

आंदोलनकारी जयंत बोहिदार ने बताया कि भारत सरकार ने रायगढ़ में जिंदल कंपनी को नया खदान आवंटित किया है। इस खदान का नाम गारे पेल्मा सेक्टर-1 है। इस खदान की जनसुनवाई 24 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन गांव वालों ने इसका विरोध किया और जनसुनवाई नहीं होने दी।

जयंत बोहिदार ने कहा कि प्रशासन ने जिंदल कंपनी के साथ मिलकर आज फिर से जनसुनवाई रख दी। आसपास के 25 हजार लोग विरोध में पहुंचे थे। आदिवासी गांवों में ग्राम सभा की सहमति के बिना कलेक्टर का गांव में प्रवेश करना सही नहीं है।

कोल खदान के खिलाफ कहां-कहां विरोध प्रदर्शन ?

पहला मामला- सरगुजा में 25 पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों पर भी पथराव

पहला मामला सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस का है। कोल माइंस विस्तार के खिलाफ ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया।

हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए ​थे। 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है।

जानकारी के अनुसार, SECL ने अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीनें साल 2001 में अधिग्रहित की थीं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगभग 500 पुलिसकर्मियों के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए गांव पहुंचे थे।

अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के विस्तार का विरोध। पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बीच पथराव।

दूसरा मामला- रायगढ़ में कोल माइंस का विरोध

वहीं दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में कोयला खदान का है। ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के लोग अपनी जल, जंगल और जमीन को खदान के लिए देने से इनकार कर चुके हैं। 6 नवंबर को उन्होंने धरना प्रदर्शन किया।

कोयला खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को ग्रामीण रद्द की मांग कर रहे थे। 6 नवंबर को करीब 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद ग्रामीण रातभर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। इस धरने में महिलाएं, बच्चे और लड़कियां भी शामिल थीं।

6 नवंबर को जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर रात भर ग्रामीण कलेक्ट्रेट के सामने बैठे थे।

तीसरा मामला- कोरबा में CISF ने ग्रामीणों पर बरसाई लाठियां

तीसरा मामला कोरबा जिले के SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान का है। गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

इस दौरान जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। भू-विस्थापित रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की गेवरा कोयला खदान में रोजगार-मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज।

Exit mobile version