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राहुल बालाघाट में मृत आदिवासी बच्चों के परिवारों से मिले:कहा- ये देश के मालिक, इन्हें हक मिले, एमपी में 84 सीटों पर आदिवासी वोटों का असर

बालाघाट, एजेंसी। राहुल गांधी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट के जगला गांव में बैगा आदिवासियों से मुलाकात की। वे यहां बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से मिलने पहुंचे थे।

एक घंटे की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं, उन्हें उनका हक मिलना चाहिए, लेकिन एमपी में ऐसा नहीं हो रहा है। केंद्र और राज्य की सरकार ने बेसहारा छोड़ दिया है। बीमारी से निपटने में राज्य सरकार पूरी तरह फेल रही। वे यह मुद्दा लोकसभा में उठाएंगे।

राहुल से मिलने आसपास के गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल में बच्चों से मिड डे मील के बारे में जाना। बालाघाट जिले में पिछले 3 महीनों में कुपोषण और मलेरिया से 32 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है।

कांग्रेस का दावा है कि मौतों की संख्या ज्यादा है। भाजपा ने राहुल के दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है।

2028 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का मिशन आदिवासी

मध्य प्रदेश की आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी 21.1% है, यानी हर पांचवां व्यक्ति। इसका असर चुनाव में भी दिखता है। विधानसभा की 230 सीटों में 47 ST के लिए आरक्षित हैं, जबकि 37 अन्य सीटों पर भी आदिवासी वोट अहम माना जाता है। यानी कुल 84 सीटों पर इसका असर है। लोकसभा की 29 सीटों में 6 ST के लिए आरक्षित हैं।

आदिवासी वोटर सत्ता की चाबी

मध्य प्रदेश विधानसभा की 47 ST आरक्षित सीटों में से BJP ने 24, कांग्रेस ने 22 और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने 1 सीट जीती। वहीं, 2018 में कांग्रेस ने 30 और BJP ने 16 ST सीटें जीती थीं। उस चुनाव में कांग्रेस को आदिवासी बहुल सीटों पर बढ़त मिली और पार्टी ने सरकार बनाई। इसके मुकाबले 2023 में BJP ने ST आरक्षित सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया और सत्ता में वापसी की।

नेता प्रतिपक्ष आदिवासी, ST कांग्रेस का अध्यक्ष भी MP से

मध्य प्रदेश कांग्रेस में इस समय आदिवासी नेतृत्व को भी अहम जिम्मेदारियां मिली हुई हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आदिवासी समुदाय से आते हैं, जबकि मध्य प्रदेश के आदिवासी नेता डॉ. विक्रांत भूरिया को 2025 में ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था।

राहुल आदिवासियों के बीच करीब एक घंटा रहे। उनकी समस्याओं को भी सुना।

राहुल आदिवासियों के बीच करीब एक घंटा रहे। उनकी समस्याओं को भी सुना।

आदिवासी परिवारों के बीच राहुल गांधी।

राहुल बोले- परिवारों को मुआवजा नहीं मिला

  • बालाघाट के आदिवासी इलाकों में कई बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण की वजह से हुई है। इसके अलावा, सरकार को जो मदद देनी चाहिए, चाहे वह स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या रोजगार से जुड़ी हो, वह यहां बिल्कुल नहीं मिल रही है। ऐसा लगता है जैसे आदिवासियों को भारत के बीचों-बीच अकेला छोड़ दिया गया हो, मानो उनके लिए न तो केंद्र सरकार है और न ही मध्य प्रदेश सरकार।
  • क्षेत्र में कुपोषण और बीमारियों की वजह से कई बच्चों की जान गई है, लेकिन सरकार की तरफ से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
  • मनरेगा ठप है, वन अधिकार कानून लागू नहीं हो रहा और आदिवासियों को जमीन के पट्टे नहीं मिल रहे हैं।
  • बच्चों की मौत के बावजूद पीड़ित परिवारों को पूरा मुआवजा तक नहीं मिला है। आधे लोग अब भी इससे वंचित हैं।
  • सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए। वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को पट्टे दे, मनरेगा का काम फिर शुरू करें और इलाके में स्कूल व अस्पताल बनाएं।
  • सरकार 24 घंटे विकास की बातें करती है और भ्रष्टाचार जारी रहता है, लेकिन जब आदिवासी भाइयों को मदद की जरूरत होती है, तो सरकार गायब दिखती है।
  • एक योजना का लाभ मिलने पर ‘लाड़ली बहना योजना’ की राशि काट ली जाती है; यदि दो योजनाएं चल रही हैं, तो आदिवासियों को दोनों का पूरा हक मिलना चाहिए।
  • हम इन्हें ‘वनवासी’ नहीं, बल्कि ‘आदिवासी’ मानते हैं। यानी देश के मूल और पहले मालिक। कांग्रेस सरकार आते ही इनकी पूरी मदद करेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार में इनका हक दिलाएगी।

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