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लखनऊ में राहुल बोले- मोदी साइकोलॉजिकली खत्म:अमेरिका के आगे नरेंदर ने सरेंडर कर दिया, वह अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं

लखनऊ,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। उन्होंने दलित वोटर्स को रिझाने के लिए जहां डॉक्टर आंबेडकर और कांशीराम की सराहना की, वहीं भारत-अमेरिका डील, पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा पर जमकर निशाना साधा।

राहुल ने कहा, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम एपस्टीन फाइल में है। उनकी बेटी की कंपनी में जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है। नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। नरेंद्र मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे, वे अमेरिका का काम कर रहे हैं। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो नरेंद्र मोदी जी भाग कर निकल गए।

नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे।

नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम यूपी के CM होते

राहुल ने कहा, कांशीरामजी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीरामजी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीरामजी कभी सफल न होते।

उन्होंने कहा,

अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लेकिन आज भाजपा ने समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। 50% को अलग-अलग कर दिया गया।

राहुल ने यह भी कहा,

नरेंद्र मोदी संविधान की विचाराधारा नहीं मानते: संविधान में जितने भी दलित महापुरुष हुए, उनकी आवाज इसमें है। सावरकरजी, नाथूराम गोडसे की आवाज इस संविधान में नहीं है। नरेंद्र मोदीजी कुछ भी कह लें, इस संविधान की विचारधारा को नहीं मानते हैं।

सारा माल अमेरिका का आएगा: मोदी ने कहा कि 9 लाख करोड़ का माल अमेरिका से खरीदेंगे। मैं पूछना चाहता हूं, हमारे बिजनेस क्या करेंगे। कपास, सोया, फल, बादाम, अखरोट अब अमेरिका के किसान यहां बेचेंगे। अमेरिका में बड़े- बड़े खेत हैं। सारा माल उनका आ जाएगा, सब खत्म कर देंगे।

यूपी में कांग्रेस को मर मिटने वाले 100 लोग चाहिए: अब हमारे पास बड़ा मौका है। हिंदुस्तान की राजनीति बदलें। कांग्रेस को सिर्फ यूपी में 100 लोग ऐसे मिल जाएं जो कह दें कि मर जाएंगे, पीछे नहीं हटेंगे। हमारे लक्ष्य को नहीं छोड़ेंगे। काम हो जाएगा हमारा।

कार्यकर्ताओं को नसीहत- राहुल गांधी जिंदाबाद करने से फायदा नहीं है

राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नसीहत भी दी। दरअसल, राहुल जब बोलने के लिए उठे तो कार्यकर्ता राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। तब उन्होंने ने कहा, राहुल गांधी जिंदाबाद करने से कोई फायदा नहीं है। इससे कुछ होता नहीं है। होता कैसे है? जो मन बना लेता है कि ये जो हो रहा है, उसे मैं एक्सेप्ट नहीं करने वाला हूं।

लखनऊ एयरपोर्ट से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान आने के लिए राहुल गांधी सफेद रंग की कार में बैठे।

एयरपोर्ट पर अजय राय और पार्टी के सभी बड़े लीडर राहुल गांधी को रिसीव करने पहुंचे थे।

कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठाएगी कांग्रेस

कांग्रेस ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव पास किया है। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी।

यह पहली बार था, जब राहुल गांधी कांशीराम जयंती से 2 दिन पहले कोई बड़ा इवेंट लखनऊ में करने आए थे। कार्यक्रम में करीब 4 हजार लोग शामिल हुए। दलित वोटर्स की सियासत में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

यूपी में कांग्रेस-सपा का गठबंधन

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन था, तब यूपी में NDA की सीटों की संख्या 36 पर सिमट गई थी। महागठबंधन 43 सीटों पर जीतने में कामयाब रहा। महागठबंधन इसी सफलता को 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोहराना चाहता है।

सपा भी कांशीराम जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने का ऐलान कर चुकी है। 15 मार्च को यूपी के 75 जिलों में पार्टी के जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम होंगे।

यूपी में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां

कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। दलित राजनीति में बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार है, खासकर जाटव समुदाय में उसका भावनात्‍मक जुड़ाव मजबूत है। दूसरी ओर, भाजपा ने भी पिछले 10 बरसों में दलित वर्गों के बीच संगठन मजबूत किया है और सरकारी योजनाओं के जरिये समर्थन बढ़ाया है, इसलिए कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं है।

बसपा-भाजपा के दबाव में, इसका दूसरी पार्टियों को फायदा

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- मौजूदा समय में बसपा सबसे कमजोर हालत में है। लोकसभा में उसका कोई भी सदस्य नहीं। यूपी के विधानसभा में मात्र एक विधायक है। राज्यसभा में भी दिसंबर के बाद उसके जीरो होने का आसार हैं।

सपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को लगता है कि कमजोर बसपा का वो विकल्प बन सकती हैं। दोनों पार्टियां बसपा को भले ही कमजोर कहने से बचती हैं, लेकिन मायावती पर भाजपा के दबाव में काम करने के आरोप लगाकर इसी कमजोरी को उजागर करने की कोशिश करती हैं।

क्या बसपा वाकई कमजोर है?

हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- ऐसा नहीं है। मायावती भले ही खुद बहुत ज्यादा नहीं निकलती हों, लेकिन उनका संगठन जमीनी स्तर पर सक्रिय है। पार्टी के कोऑर्डिनेटर खामोशी से संगठन का काम कर रहे हैं। 9 अक्टूबर, 2025 को लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी लाखों की भीड़ इसकी बानगी भी है। बसपा का कोर वोटर फिर तेजी से जुड़ रहा।

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