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रणजी ट्रॉफी में 78 साल बाद 400 रन की पारी:मिजोरम के चिन्मय ने किया कारनामा, किसी भारतीय का दूसरा हाईएस्ट स्कोर

दीमापुर, एजेंसी। मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नगालैंड के खिलाफ 400 रन की नाबाद पारी खेली। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में यह आंकड़ा छूने वाले दूसरे भारतीय बने। उनसे पहले 1948 में महाराष्ट्र के बाबासाहेब निंबालकर ने काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे।

दीमापुर में 29 साल के चिन्मय ने 517 गेंदों पर 46 चौके और 7 छक्के लगाए। इस पारी के साथ वे रणजी ट्रॉफी की एक पारी में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

आखिरी विकेट के लिए 189 रन की साझेदारी

  • मिजोरम की शुरुआत खराब रही। साहिल रेजा 4 रन बनाकर आउट हुए, जबकि लालरुआइजेला ने 63 गेंदों पर 31 रन बनाए। जोसेफ ललथनखुमा 1 रन ही बना सके और मनेंद्र सिंह ने 39 गेंदों पर 27 रन जोड़े।
  • तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे चिन्मय ने विकेटकीपर जेहु एंडरसन के साथ 168 रन की साझेदारी की। एंडरसन ने 151 गेंदों पर 69 रन बनाए। इसके बाद नागालैंड के गेंदबाजों ने वापसी करते हुए मिजोरम का स्कोर 314/4 से 392/9 कर दिया।
  • नौ विकेट गिरने के बाद चिन्मय और आखिरी बल्लेबाज लालरेमपुइया छकछुआक ने मोर्चा संभाला। दोनों ने 10वें विकेट के लिए नाबाद 189 रन जोड़े। छकछुआक ने 76 गेंदों पर 14 रन बनाए, जबकि चिन्मय ने इसी साझेदारी के दौरान 400 रन पूरे किए। इसके बाद मिजोरम ने 581/9 पर पारी घोषित कर दी।

दूसरे फर्स्ट क्लास मैच में ही 400 रन

चिन्मय ने अपना दूसरा फर्स्ट क्लास मैच खेलते हुए यह ऐतिहासिक पारी खेली। 2026-27 सीजन से पहले उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) से NOC लेकर मिजोरम की टीम जॉइन की थी।

मिजोरम के लिए रणजी ट्रॉफी डेब्यू में उन्होंने मणिपुर के खिलाफ पहली पारी में 35 और दूसरी में 99 रन बनाए थे। हालांकि, टीम को 3 विकेट से हार मिली थी।

इस साल चिन्मय विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेले। जून में उन्होंने मुंबई T20 लीग में मराठा रॉयल्स को खिताब बचाने में मदद की। टूर्नामेंट में लगातार दो अर्धशतक लगाने वाले चिन्मय ने छह पारियों में 212 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट करीब 120 रहा।

ब्रैडमैन के रिकॉर्ड तोड़ने से 8 रन दूर रह गए थे निंबालकर

निंबालकर ने दिसंबर 1948 में पुणे में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। उनकी पारी में 49 चौके और एक छक्का शामिल था।

उस मैच में काठियावाड़ ने पहली पारी में 238 रन बनाए थे। जवाब में महाराष्ट्र ने 826/4 का स्कोर खड़ा कर दिया। तीसरे दिन निंबालकर 443 रन पर नाबाद थे और डॉन ब्रैडमैन के 452 रन के तत्कालीन फर्स्ट क्लास विश्व रिकॉर्ड से सिर्फ 9 रन दूर थे।

लंच के बाद काठियावाड़ के कप्तान ने महाराष्ट्र के पारी घोषित नहीं करने पर मैदान में उतरने से इनकार कर दिया। महाराष्ट्र के कप्तान राजा गोखले और अंपायरों ने उनसे कुछ और ओवर खेलने की अपील की, ताकि निंबालकर रिकॉर्ड तोड़ सकें। लेकिन काठियावाड़ की टीम मैदान छोड़कर चली गई और मैच गंवा दिया।

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