रायपुर, एजेंसी। करवा चौथ पर गुरुवार (29 अक्टूबर) को महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत रखेंगी। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद रात में चांद के दर्शन कर व्रत खोलेंगी। चंद्रोदय के अनुमानित समय के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सबसे पहले बलरामपुर में रात 8:02 बजे चांद निकलने की उम्मीद है। इसके बाद अंबिकापुर में रात 8:03 बजे और कोरबा में रात 8:06 बजे चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं।
राजधानी रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने का अनुमान है। वहीं, जगदलपुर में रात 8:17 से 8:22 बजे के बीच चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं। इस बार चक्रवात ‘अर्नब’ के असर से कई जगहों पर बादल छाए रहने की आशंका है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, यदि करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो भगवान शिव और गणेश जी के मंदिर जाकर मानसिक दर्शन कर सकते हैं। भगवान शिव की जटाओं में चंद्रदेव विराजमान हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।

बादलों के कारण देर से होंगे चांद के दर्शन
चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। ऐसे में चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आने के बाद भी दिखाई नहीं दे सकता। ऊंची इमारतों, पहाड़ियों और स्थानीय मौसम के कारण भी चांद देखने में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है।
सुबह सरगी से शुरू होगा व्रत
करवा चौथ पर महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे और फेनी जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं।
शाम को करवा चौथ माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इस दौरान महिलाएं करवा चौथ की कथा भी सुनती हैं।
करवा चौथ पर महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाकर सोलह शृंगार करती हैं। इस मौके पर दुल्हन मेहंदी, अरेबिक मेहंदी, मंडला आर्ट और बेल-पत्ती वाली डिजाइन काफी पसंद की जाती हैं। कई महिलाएं हथेलियों पर चांद, छलनी और पति-पत्नी की आकृति भी बनवाती हैं। मेहंदी के गहरे रंग को प्रेम और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है।