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बिलासपुर में डाक बांटने निकला आरक्षक 54 दिन बाद लौटा:51 बार मिली थी चेतावनी, विभागीय जांच के बाद एसएसपी ने दी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर पुलिस लाइन में पदस्थ एक आरक्षक डाक बांटने के लिए निकला था, लेकिन इसके बाद वह 54 दिन तक ड्यूटी से गायब रहा। विभागीय जांच में सामने आया कि उसे पहले भी 51 बार चेतावनी दी जा चुकी थी।

जांच पूरी होने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने आरक्षक के खिलाफ कार्रवाई की। बिना सूचना लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहने और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के मामले में उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई है।

दिनेश पुलिस लाइन में प्रधान आरक्षक के पद पर कार्यरत था। वह बिना सूचना दिए कई बार ड्यूटी से गैरहाजिर रहा। इस मामले में उसके खिलाफ विभागीय जांच कराई गई।

जांच में सामने आया कि दिनेश 30 नवंबर 2023 से 3 जनवरी 2024 तक 32 दिन और 11 सितंबर से 3 अक्टूबर 2024 तक 22 दिन बिना सूचना ड्यूटी से गैरहाजिर रहा। इस तरह वह कुल 54 दिन ड्यूटी से नदारद रहा। विभागीय जांच में यह आरोप प्रमाणित पाया गया। इसके बाद उसके खिलाफ अंतिम दंडादेश जारी किया गया।

51 बार पहले ही दी जा चुकी है चेतावनी

विभागीय जांच में सामने आया कि आरक्षक को पहले भी बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के मामलों में 51 बार एलआर-24 किया जा चुका था। इसके अलावा उसे 21 छोटी और 4 बड़ी सजाएं भी मिल चुकी थीं।

विभाग ने इसे सेवा में सुधार का पर्याप्त मौका माना। इसके बावजूद जांच अधिकारी ने लगातार अनुशासनहीनता और ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने के दोनों आरोपों को सही पाया।

जांच के दौरान सुनवाई का दिया पूरा मौका

विभागीय जांच के बाद आरक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त मौका दिया गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी उसने तय समय में अपना आवेदन नहीं दिया। 25 अगस्त 2026 को उसे दोबारा मौका दिया गया, लेकिन वह फिर भी उपस्थित नहीं हुआ। विभाग ने इसे असहयोगात्मक रवैया माना और इसके बाद अंतिम निर्णय लिया।

आदेश में आरक्षक की लंबी सेवा को देखते हुए उसके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया गया। हालांकि, पहले कई बार सजा मिलने के बावजूद उसके व्यवहार और कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ। इसे गंभीर मानते हुए आरक्षक दिनेश प्रधान को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई। आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।

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