सक्ती। सक्ती जिले स्थित आरकेएम पावर प्लांट में लिफ्ट गिरने से हुई चार मजदूरों की मौत मामले में कंपनी के डायरेक्टर, अफसरों समेत 7 जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि लिफ्ट का मेंटेनेंस पिछले 12 वर्षों से नहीं किया गया था, जिसे हादसे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। अब इस तकनीकी लापरवाही की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
इधर, मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना को 36 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया है। परिजन मौके पर मौजूद हैं, लेकिन न तो कंपनी का कोई अधिकारी सामने आया है, और न ही ठेकेदार। मुआवजे को लेकर भी अब तक कोई राशि तय नहीं की गई है, जिससे परिजनों में आक्रोश है।
अस्पताल के बाहर रोते बिलखते परिजन।
दो और मजदूरों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया है।
मजदूर बोले- 12 साल से लिफ्ट की सर्विसिंग नहीं
प्रत्यक्षदर्शियों और मजदूरों का कहना है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ है। मजदूरों ने बताया कि लिफ्ट की पिछले लगभग 12 सालों से सर्विसिंग नहीं की गई थी। सेफ्टी बेल्ट, वायर और अन्य उपकरण जर्जर हालत में थे, जिसकी शिकायतें बार-बार की गई थीं, लेकिन प्रबंधन ने कोई सुधार नहीं किया।
हादसे के तुरंत बाद, प्लांट प्रबंधन ने गेट बंद कर मीडिया को अंदर जाने से रोक दिया, जिससे संदेह और गहरा गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट में अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी होती है और छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं, जिन्हें पहले पैसे और प्रभाव के दम पर दबा दिया जाता था।
हादसे में 6 गंभीर घायल हुए थे। जिनका इलाज फिलहाल जारी है।
IG के नेतृत्व में हुई कार्रवाई
पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश में कार्रवाई करते हुए, आर.के.एम. पावर जेनरेशन कंपनी के निदेशकों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, कलेक्टर ने पूरे मामले की दंडाधिकारी (मजिस्ट्रियल) जांच के आदेश भी दिए हैं।
30 दिनों के अंदर देनी होगी रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा 7 अक्टूबर की रात लगभग 8 बजे हुआ, जिसमें चार मजदूरों की मौत और छह अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 176(1) के तहत मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए। जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
घटना कब और कैसे हुई, उस समय कौन-कौन मजदूर कार्यरत थे, हादसे के तकनीकी या मानवीय कारण क्या थे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। इसकी जांच होगी।
इसके अलावा, यह भी जांच की जाएगी कि औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने उत्पादन शुरू होने के बाद से अब तक कितनी बार निरीक्षण किया और क्या उन निरीक्षणों में कोई खामियां पाई गई थीं। साथ ही, भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकने के लिए निवारक उपाय और सुझाव भी मांगे गए हैं।
जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल मृत मजदूरों के परिजन मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि प्लांट प्रबंधन अब तक चुप्पी साधे हुए है।
