फतेहाबाद,एजेंसी। रूस-यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जंग जारी है। रूसी सेना पर वहां आए कई भारतीयों को लालच देकर सेना में भर्ती करने और जंग में धकेलने के आरोप लग रहे हैं। वहां फंसे युवाओं ने बताया कि रशियन आर्मी को मैन पावर उपलब्ध कराने वाला बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
यह नेटवर्क सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देशों के युवाओं को भी पैसे का लालच देकर फंसाता है। ये वो युवा हैं, जो स्टडी वीजा या नौकरी की तलाश में रूस जाते हैं। उन्हें रशियन आर्मी में भर्ती कर 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है और फिर यूक्रेन के साथ युद्ध में भेज दिया जाता है।
ऐसा ही मामला हरियाणा के फतेहाबाद जिले से आया है। कुम्हारिया गांव के अंकित जांगड़ा और विजय पुनिया रूस में पढ़ाई के साथ जॉब कर रहे थे। लेकिन दोनों ही अब रूसी सेना में हैं और यूक्रेन-रूस के युद्ध क्षेत्र यानी जीरो लाइन से सिर्फ 15-20 किलोमीटर दूर रह गए हैं।
उनके परिजन दोनों की वापसी के लिए गुरुवार को दिल्ली में विदेश मंत्रालय और चंडीगढ़ में सीएम कार्यालय गए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस के सभी हेल्प डेस्क पर मेल भेजा है और रूसी विदेश मंत्रालय को भी सारे डॉक्यूमेंट्स और आईडी कार्ड भेजे हैं।
अंकित और विजय के साथ पंजाब, जम्मू, राजस्थान, उत्तराखंड और यूपी के युवा भी वहां फंसे हैं। कुम्हारिया गांव के ही रमेश कुमार मॉस्को गए थे। रमेश उन कुछ भाग्यशाली युवाओं में हैं, जो समय रहते गांव लौट आए।
अंकित के घर में बैठे परिजन और उसका दोस्त रमेश (सबसे दाएं वाला)। रमेश ने ही रूस में भारतीय युवाओं के साथ क्या हो रहा है, इसकी जानकारी दी।
मॉस्को से लौटे रमेश ने बताई पूरी कहानी…
- मार्च 2024 में स्टडी वीजा पर मॉस्को गया : रमेश कुमार ने बताया- मैं जुलाई 2024 में स्टडी वीजा लगवाकर रूस गया था। मॉस्को के कॉलेज में एडमिशन ले लिया। कॉलेज में हफ्ते में दो दिन ही क्लास लगती है। कॉलेज पार्ट टाइम जॉब करने के लिए परमिशन देता था। ज्यादातर स्टूडेंट रेस्टोरेंट में हेल्पर या कंस्ट्रक्शन के काम में लग जाते हैं। मेरे साथ गांव का विजय पुनिया भी था। मुझे वहां ठीक नहीं लगा। मैं मार्च-2025 में लौट आया। मेरे साथ विजय भी गांव लौटा। फिर विजय जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस लौट गया, लेकिन मेरा मन नहीं माना। मैं गांव में ही रुक गया।
- लालच देकर आर्मी में भर्ती कर रहे : रमेश बताते हैं कि रूस की आर्मी में भर्ती कराने वाला नेटवर्क सक्रिय है, जो पैसे का लालच देकर युवाओं को फंसाता है। ट्रेनिंग के नाम पर भी महज 10 दिन सिर्फ गन चलाना सिखाते हैं, फिर मरने के लिए युद्ध में छोड़ दिया जाता है। इन युवाओं के सामने दो ही सूरत बचती हैं- मर जाओ या सामने वाले को मार दो।
- कई देशों के युवाओं को फंसाया जा रहा : रमेश बताते हैं- रुस में ऐसे नेटवर्क एक्टिव हैं, जो इंडिया ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के युवाओं को लालच देकर वहां की आर्मी में भर्ती करवाते हैं। वह लग्जरी लाइफ, बड़ी रकम देने का लालच देते हैं। श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान देशों के युवकों को भी रूस की आर्मी ज्वाइन करवाते हैं। उज्बेकिस्तान, किर्गीस्तान के लोगों को रशियन लेंग्वेज आती है, वो उनके बहकावे में नहीं आते। भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका के लोग उनके बहकावे में आकर फंस जाते हैं।
युवकों ने कुछ वीडियो भेजे हैं। बताया कि उन्हें रशियन आर्मी ने यूक्रेन के जंगल में छोड़ दिया है।
अंकित-विजय किस हालत में, परिवार ने बताया… फतेहाबाद के अंकित जांगड़ा और विजय पुनिया को अन्य युवाओं के साथ रूस और यूक्रेन के पुराने बॉर्डर से 300 किलोमीटर दूर आगे डोनेक्सो के जंगल में रोका गया, जहां से जीराे लाइन मात्र 15 किलोमीटर दूर है। जीरो लाइन पर स्थिति बेहद भयावह है। इस जीरो लाइन पर इन युवकों के जो भी साथी गए हैं, वो फिर नहीं लौटे। इन युवकों को भी दो-तीन दिन में जीरो लाइन पर भेजे जाने की बात कही जा रही है।
- बेटे को दिलासा दे रही मां- हम तुम्हें बचा लेंगे : अंकित जांगड़ा ने मंगलवार शाम को मां सुशीला देवी के साथ वीडियो कॉल की। मां ने बेटे से पूछा कि कैसे हो। अंकित ने जवाब दिया कि ठीक हूं। मां ने दिलासा दिया- होशियार रहना, जल्दी तुम्हारी वापसी करवाएंगे। तुम अकेले नहीं हो, बहुत दुनिया तुम्हारे साथ है। इसके बाद विजय से भी बात की गई कि हौसला रखना, बहुत जल्द तुम्हें निकाल कर लाएंगे। यूं ना सोचना कि कोई तुम्हारे साथ नहीं है, चिंता मत करना बेटा।
- भगवान से प्रार्थना कर रहे परिजन : परिवार से बात करने के लिए दैनिक भास्कर एप की टीम गुरुवार को गांव कुम्हारिया पहुंची। अंकित के पिता रामप्रसाद और मां सुशीला और विजय की मां सुमन देवी बस बेटे की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अंकित का बड़ा भाई रघुवीर और विजय का छोटा भाई सुनील लगातार अधिकारियों और नेताओं के यहां जा रहे हैं, ताकि उनकी वापसी हो सके।
- हर महीने घर 70-80 हजार भेज रहा था अंकित : अंकित के पिता रामप्रसाद ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कुछ सुधरे, इस उम्मीद में बेटे को रूस भेजा था। वह फरवरी 2025 में मॉस्को गया था। वहां वह पढ़ाई के साथ-साथ काम करने लगा। पहले रेस्टोरेंट में हेल्पर का काम किया। हर महीने 70-80 हजार रुपए भेज रहा था। इससे घर का अच्छा गुजारा चल रहा था। मकान भी नया बनाना शुरू कर दिया था। अभी घर का कंस्ट्रक्शन का काम बाकी पड़ा है। घर में लगातार ग्रामीण आकर हौसला बढ़ा रहे हैं।

जॉब का झांसा देकर रशियन महिला ने फंसाया : रामप्रसाद बताते हैं कि रूस के मॉस्को शहर में रेलवे स्टेशन पर बेटे को एक महिला मिली, जिसने सिक्योरिटी गार्ड या ड्राइवर की जॉब लगवाने की बात कही। उसने कहा कि तीन महीने की ट्रेनिंग होगी। इसके बाद 15 से 20 लाख रुपए मिलेंगे। फिर हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपए मिलेंगे। अंकित और विजय ने सोचा कि इससे घरवालों की और अच्छी मदद कर पाएंगे। मगर, उस महिला ने रूस की आर्मी में जबरन भर्ती करवा दिया। एग्रीमेंट साइन करवा दिया। इसके बाद उन्हें बंद कंटेनर में रूस से यूक्रेन के शहर सोलीडेव के जंगलों में ले जाया गया, जहां बंकर जैसे कमरे में छोड़ दिया। अब तो पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नायब सैनी से यही आस है कि बेटे को वहां से छुड़वा कर सुरक्षित घर पहुंचा दें। इसके बाद बेटे को कहीं नहीं भेजेंगे।
गले से निवाला नहीं उतर रहा : अंकित की मां सुशीला देवी कैमरे के सामने तो नहीं आईं। मगर, बातचीत में कहती हैं कि जब से अंकित के हालातों के बारे में सुना है, तब से परिवार के सदस्यों के गले से खाना भी नहीं उतर रहा है। सुबह-शाम अपने कुलदेवता, लोक देवता और अन्य देवी-देवताओं से बेटे की सलामती और सकुशल वापसी की मन्नतें मांग रहे हैं। अंकित के परिवार को उसके दोस्त, पड़ोसी और अन्य ग्रामीण लगातार दिलासा दिला रहे हैं। जब से विजय ने बताया है कि तीन दिन बाद युद्ध में भेज देंगे, तब से चिंता और बढ़ गई है।
यूक्रेन से युवकों ने यह वीडियो भी जारी किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि यह उनका अंतिम वीडियो हो सकता है।
दूसरे प्रदेशों के ये युवक भी फंसे
कुम्हारिया के युवकों के साथ इस चंगुल में पंजाब के लुधियाना जिले के अमरपुरी ढाबा पिंड के समरजीत सिंह, पंजाब के ही मोगा जिला निवासी बूटा सिंह, पंजाब के ही जालंधर जिले के बोहजा निवासी गुरसेवक सिंह, उत्तराखंड के हलद्वानी निवासी तसलीम, यूपी के बरेली जिले के माजरा फतेहगंज निवासी सावेद भी फंसे हैं।
विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी….
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा एक्स पर जारी बयान।
नागरिकों को वापस भेजने की मांग की: उन्होंने आगे कहा- हमने दिल्ली और मॉस्को दोनों जगहों पर रूसी अधिकारियों के सामने भी यह मामला उठाया है। हमने अनुरोध किया है कि इस प्रथा को समाप्त किया जाए। हमारे नागरिकों को वापस भेजा जाए। हम प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों के संपर्क में भी हैं।
रूसी सेना में शामिल होने वाले प्रस्ताव से दूर रहें: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि, हम अपने नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि वे सतर्क रहें। हम भारतीय नागरिकों से अपील करते हैं कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहें। ऐसा करना जान जोखिम में डालने या खतरे से खेलने जैसा है।
हमने रिपोर्ट देखी है: मीडिया को इसी मामले से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने हाल ही में रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के बारे में रिपोर्ट देखी हैं। सरकार ने पिछले एक साल में कई मौकों पर इस तरह की कार्रवाई में निहित जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है।
