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महाकुंभ के समय सारनाथ एक्सप्रेस कैंसिल:बिलासपुर में विरोध शुरू, कहा- छत्तीसगढ़ के लाखों यात्रियों के साथ अन्याय, बहाली की मांग

बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ से यूपी को जाने वाली सारनाथ एक्सप्रेस को 76 दिनों के लिए कैंसिल करने के रेल प्रशासन के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि जब मौसम विज्ञानी 7 दिनों से अधिक के मौसम की भविष्यवाणी नहीं कर पाते तब रेल प्रशासन का कोहरा छाने का तर्क देकर सारनाथ एक्सप्रेस को एकमुश्त 76 दिनों के लिए कैंसिल करना गले से नीचे नहीं उतर रहा है।

हैरान करने वाली बात यह है कि रेल प्रशासन ने ऐसे समय यह फैसला लिया है, जब प्रयागराज में महाकुंभ की तैयारियां चल रही हैं।

बता दें कि प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक महाकुंभ का आयोजन होना है। रेल प्रशासन महाकुंभ के लिए तो अनेक स्पेशल ट्रेनें चला रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के लाखों यात्रियों के लिए असुविधा होगी।

इसलिए इसका विरोध शुरू हो गया है। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन के दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीने में 76 दिनों तक सारनाथ एक्सप्रेस को रद्द करने के निर्णय की कड़ी आलोचना की है।

सीपीपीआरओ बोले-कुछ फेरे कैंसिल किए

सीपीआरओ सुस्कर विपुल विलास राव का कहना है कि ठंड के मौसम में कोहरे के कारण यह ट्रेन बहुत बार बहुत ज्यादा लेट हो जाती है। इसको देखते हुए कुछ दिनों के लिए इस ट्रेन को कैंसिल किया जाता है। यह ट्रेन कंटीन्यू कैंसिल नहीं की जाती बल्कि इसके कुछ फेरे कैंसिल किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी में सारनाथ एक्सप्रेस के कुछ फेरे कैंसिल किए गए हैं। यह ट्रेन लंबी दूरी की ट्रेन है और यह छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश ,यूपी और बिहार जाती है। उत्तर भारत में कोहरा ज्यादा पड़ता है और इसके चलते विजिबिलिटी कम हो जाती है , जिसके कारण ट्रेन की स्पीड और बाकी ऑपरेशन प्रभावित होते हैं। इसी वजह से यह ट्रेन बहुत ज्यादा डिले होती है।

3 लाख छत्तीसगढ़ियों की ट्रेन छीनी

समिति का दो टूक कहना है कि महाकुंभ प्रयागराज में होने वाला है और ऐसे समय सारनाथ एक्सप्रेस को रद्द करना छत्तीसगढ़ राज्य के साथ घोर अन्याय है।

वरिष्ठ एडव्होकेट एवं समिति के पदाधिकारी सुदीप श्रीवास्तव की मानें तो सारनाथ एक्सप्रेस में 22 डिब्बे लगते हैं, इस आधार पर एक बार में कम से कम 1500 यात्री उत्तर भारत की ओर यात्रा करते हैं या वहां से वापस छत्तीसगढ़ आते हैं । 76 दिनों तक इस ट्रेन को रद्द करने का मतलब है लगभग तीन लाख लोगों को यात्रा के सबसे सुलभ और सरल यातायात के साधन से वंचित करना।

समिति ने सवाल उठाया की छत्तीसगढ़ की जनता ने राज्य में भाजपा की सरकार बनाई है और संसद में 10 सांसदों को चुनकर भेजा है, इसके बावजूद क्या छत्तीसगढ़ को भेदभाव का सामना करना पड़ेगा?

छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति के मुताबिक एक तरफ तो महाकुंभ के लिए रेलवे 150 से अधिक स्पेशल ट्रेन चलाने की तैयारी में है वहीं छत्तीसगढ़ की छपरा से दुर्ग और दुर्ग से छपरा के मध्य चलने वाली सारनाथ एक्सप्रेस को 3 महीने में 76 दिनों तक के लिए रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

कोहरे का तर्क हास्यास्पद

छात्र युवा रेलवे जोन नागरिक संघर्ष समिति ने कहा की वास्तव में कड़ी ठंड के मौसम में भी सभी दिन कोहरा नहीं पड़ता। कोहरे के दिन साल में अधिकतम 30 -35 ही होते हैं परंतु इसके लिए एकमुश्त 76 दिनों के लिए ट्रेन कैंसिल नहीं की जाती। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोहरे के कारण ट्रेन रद्द करना सही निर्णय है तो उत्तर भारत में चलने वाली सभी ट्रेनों को इसी अवधि में कैंसिल कर दिया जाएगा क्या?

छात्र युवा नागरिक रेल जोन संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन से 76 दिनों के लिए सारनाथ एक्सप्रेस को कैंसिल करने के निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की है, अन्यथा इसके विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है।

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