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भिलाई में मन की बात में शामिल हुईं सरोज पांडेय:युवाओं से कहा-पढ़ाई के साथ समाज की जिम्मेदारी निभाएं, देश के विकास में योगदान दें

दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात युवाओं के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) जिला भिलाई के अध्यक्ष सौरभ जायसवाल के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सरोज पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी सोच, मेहनत और नए विचार ही भारत के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर देश और समाज के विकास में योगदान देना चाहिए।

भिलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में शामिल हुए पदाधिकारी।

भिलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में शामिल हुए पदाधिकारी।

डॉ. सरोज पांडेय ने कहा कि आज का दौर तेजी से बदलती तकनीक और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें नए कौशल सीखने, तकनीक को समझने और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने पर भी ध्यान देना होगा। लगातार सीखने की आदत, अनुशासन और आत्मविश्वास से युवा अपने लिए नए अवसर बना सकते हैं।

असफलताओं से सीखें, चुनौतियों से न घबराएं

डॉ. पांडेय ने विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करने और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है कि वे अपने लक्ष्य तय करें और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करें। केवल अपने करियर के बारे में सोचना ही काफी नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। युवा समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए पहल कर सकते हैं। जनहित के कामों में भाग लेना, लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभाना और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना भी देश सेवा का हिस्सा है।

युवाओं को अपनी बात रखने का मंच देना उद्देश्य

भाजयुमो जिला अध्यक्ष सौरभ जायसवाल ने कहा कि मन की बात युवाओं के साथ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के विचारों, सुझावों और अपेक्षाओं को सुनना है। युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मक सोच को सही दिशा देने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं। इससे उन्हें अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन मिलता है और वे सामाजिक व राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझ पाते हैं।

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