मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और निजी क्षेत्र की दो प्रमुख बैंकों, आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) को फिर से महत्वपूर्ण घरेलू बैंकों (Domestic Systemically Important Banks- D-SIBs) की सूची में शामिल किया है।
D-SIB के तहत आने के लिए बैंकों को कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। इन बैंकों को एक विशेष वर्ग में रखा गया है, जिसके अनुसार उन्हें कैपिटल कंजर्वेशन बफर के साथ उच्चतम सामान्य इक्विटी टियर 1 (CET1) बनाए रखना आवश्यक है। SBI को बकेट 4 में रखा गया है और उसे 0.80 प्रतिशत अतिरिक्त सामान्य इक्विटी टियर 1 बनाए रखना होगा। वहीं, एचडीएफसी बैंक बकेट 2 में है और उसे 0.40 प्रतिशत CET1 बनाए रखना आवश्यक है। आईसीआईसीआई बैंक को बकेट 1 में रखा गया है, जिसके लिए 0.20 प्रतिशत CET1 बफर होना चाहिए। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि SBI और HDFC बैंक के लिए अधिक D-SIB सरचार्ज 1 अप्रैल, 2025 से लागू होगा।
D-SIB वे बैंक होते हैं जिन्हें ‘टू बिग टू फेल’ (TBTF) की श्रेणी में रखा जाता है। इन बैंकों के विफल होने का बड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसके चलते सरकार ऐसे बैंकों को संकट के समय में सहायता करती है। आरबीआई ने साल 2023 में इन तीनों बैंकों को D-SIB की श्रेणी में अधिकृत किया। मौजूदा जानकारी 31 मार्च, 2024 तक बैंकों से एकत्रित किए गए डेटा पर आधारित है।
आरबीआई ने D-SIB दिशानिर्देशों का फ्रेमवर्क 2014 में तैयार किया था। शुरूआत में SBI को 2015 में इसके तहत शामिल किया गया, जबकि ICICI बैंक को 2016 में और HDFC बैंक को 2017 में D-SIB की सूची में जोड़ा गया।
