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SECL दीपका क्षेत्र में ठेका मजदूर के हक पर डाका, मौत के बाद भी परिवार CMPF खाता नंबर के लिए भटकने को मजबूर

कोरबा/दीपका। एसईसीएल (SECL) दीपका क्षेत्र में कार्यरत ठेकेदारों द्वारा मजदूरों के हक और उनके कानूनी अधिकारों के हनन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक मृत ठेका श्रमिक के परिजनों को उनके पिता की गाढ़ी कमाई और भविष्य निधि (CMPF) की राशि पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन प्रबंधन और ठेकेदार मूकदर्शक बने बैठे हैं ।

प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार ग्राम अड़ीकछार हरदीबाजार जिला कोरबा के निवासी स्वर्गीय दादू सिंह ठेकेदार कुंदन कुमार के अधीन अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक एसईसीएल दीपका क्षेत्र में कार्यरत थे, जनवरी 2018 में उनका आकस्मिक निधन हो गया ।

मृत्यु के बाद जब उनके पुत्र राधे श्याम आयाम ने पिता की भविष्य निधि (CMPF) संबंधी कागजी कार्रवाई शुरू करनी चाही तो उन्हें पता चला कि संबंधित ठेकेदार द्वारा आज तक उनका CMPF खाता क्रमांक (A/C No.) ही उपलब्ध नहीं कराया गया है ।

ठेकेदार की मनमानी और प्रबंधन की उदासीनता

पीड़ित पुत्र राधे श्याम ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित ठेकेदार से अपने पिता के CMPF खाते की जानकारी मांगी, लेकिन हर बार बात को टाल दिया गया। ठेकेदार द्वारा जानबूझकर जानकारी छुपाने और सहयोग न करने के कारण पीड़ित परिवार आगे की कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है ।

थक-हारकर पीड़ित ने 10 जून 2026 को पर्सनल मैनेजर SECL दीपका क्षेत्र के कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसकी पावती संख्या 716 है। पत्र में मांग की गई है कि संबंधित अभिलेखों की जांच कर ठेकेदार को कड़े निर्देश दिए जाएं और CMPF खाता क्रमांक जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए ।

पीड़ित परिवार की मांग और चेतावनी

मृतक के पुत्र राधेश्याम आयाम ने बताया कि मेरे पिता ने एसईसीएल के लिए अपनी पूरी ईमानदारी से काम किया आज उनके जाने के बाद उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज है, लेकिन ठेकेदार और अधिकारी हमारी सुध नहीं ले रहे हैं, अगर एसईसीएल प्रबंधन ने जल्द ही ठेकेदार पर कार्रवाई करते हुए हमें हमारे पिता का CMPF नंबर और न्याय नहीं दिलाया तो हम आंदोलन के लिए विवश व बाध्य होंगे ।

यह मामला एसईसीएल दीपका क्षेत्र में ठेका मजदूरों के हो रहे शोषण की पोल खोलता है, अब देखना यह है कि एसईसीएल के उच्च अधिकारी इस गरीब और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाते हैं या ठेकेदार की इस मनमानी को संरक्षण देते हैं ।

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