कोरबा/दीपका-गेवरा। भारतीय जनता मजदूर संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश ने एस.ई.सी.एल. (SECL) दीपका एवं गेवरा कोयला उत्खनन क्षेत्र द्वारा अधिग्रहित ग्राम हरदीबाजार के प्रभावित भू-विस्थापितों के हक न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रदेश संयुक्त महामंत्री (समाजसेवी) मनीराम भारती ने एस.ई.सी.एल. प्रबंधन जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तानाशाही पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक दीपका/गेवरा क्षेत्र को कड़ी चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा है ।
संघ ने आरोप लगाया है कि एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास प्रक्रिया में भारी अपारदर्शिता और अनियमितता बरती जा रही है। ड्रोन कैमरा जी.पी.एस. सर्वे और नियम विरुद्ध कट-ऑफ डेट का बहाना बनाकर भू-विस्थापितों के मुआवजे में 40% से 100% तक की भारी कटौती की जा रही है] जो ग्रामीणों के अधिकारों पर सीधा डाका है ।
प्रमुख मांगें एवं उठाये गए ज्वलंत मुद्दे
- 100% सोलेशियम एवं पारदर्शी सर्वे:- मकानों की नापी एवं सर्वे में नया-पुराना का ढोंग बंद किया जाए। सर्वे के समय मौजूद सभी संरचनाओं को वैध मानते हुए, बिना किसी कटौती के 100% सोलेशियम क्षतिपूर्ति के साथ मुआवजा दिया जाए ।
- 4 गुना बढ़ा हुआ मुआवजा व लंबित ब्याज:- 2013 के कानून के तहत वर्तमान बाजार दर से 4 गुना मुआवजा दिया जाए, साथ ही वर्ष 2004 2010 और 2025 में अधिग्रहित भूमियों पर पिछले 15 से 22 वर्षों का 12% से 18% की दर से लंबित बैंक ब्याज का भुगतान तुरंत किया जाए ।
- संशोधित मुआवजा दरें (रायपुर मार्गदर्शिका 2025):-
टीन शेड:- रू.2,800/- प्रति
वर्गफीट बिल्डिंग:- रू.4,600/- प्रति वर्गफीट
गोदाम: रू.6,200/- प्रति वर्गफीट
दुकान/स्कूल भवन:- रू.7,200/- प्रति वर्गफीट
भूमि का मुआवजा:- रू.32 लाख प्रति एकड़ की दर से 4 गुना भुगतान किया जाए । - कोयला उत्पादन का 5% लाभांश:- खदानों से जितना भी कोयला उत्पादन होगा, उसका 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष विस्थापित परिवारों को रॉयल्टी/लाभांश के रूप में प्रदान किया जाए ।
- सम्मानजनक पुनर्वास एवं रोजगार:-
0.01 डिसमिल भूमि पर म.प्र. पुनर्वास नीति 1991 के तहत स्थायी नौकरी दी जाए ।
जो परिवार बसाहट में नहीं जाना चाहते उन्हें रू.15 लाख एकमुश्त एवं रू.3 लाख मलबा धुलाई भत्ता दिया जाए ।
भूमिहीन विस्थापित परिवारों को ठेका कंपनियों में अनिवार्य रूप से रोजगार मिले । - गुंडागर्दी एवं भय के माहौल पर रोक:- पुलिस बल सी.आर.पी.एफ. और प्राइवेट कलिंगा कंपनी के बाउंसरों/गुंडों के दम पर ग्रामीणों को डराना-धमकाना तुरंत बंद किया जाए ।
- संवैधानिक संस्थाओं के पत्रों का सम्मान:- महामहिम राष्ट्रपति सचिवालय (15.06.2026), महामहिम राज्यपाल (10.04.2026) एवं बिलासपुर आयुक्त (30.04.2026) द्वारा कोरबा कलेक्टर व प्रबंधन से जवाब मांगा गया था, जिसे दबाया जा रहा है, शासन-प्रशासन इस पर अविलंब स्थिति स्पष्ट करे ।
आंदोलन व खदान बंदी की चेतावनी
भारतीय जनता मजदूर संघ ने प्रबंधन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भू-विस्थापितों की समस्याओं का सम्मानपूर्वक निराकरण नहीं किया गया, तो संघ प्रभावित ग्रामीणों के साथ मिलकर एस.ई.सी.एल. दीपका एवं गेवरा खदानों का चक्काजाम कर अनिश्चितकालीन खदान बंदी आंदोलन करेगा। इस दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या आर्थिक नुकसान की सम्पूर्ण जिम्मेदारी एस.ई.सी.एल. प्रबंधन दीपका/गेवरा क्षेत्र की होगी।

