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सेवा संकल्प अभियान:कभी मिट्टी के दो कमरों का घर था सपना, आज पक्के मकान में पूरा हुआ अपना आशियाना

प्रधानमंत्री आवास योजना ने सुनील तिवारी के परिवार को दी सुरक्षित और सम्मानजनक जिंदगी
कोरबा 17 सितंबर 2026। नगर पंचायत छुरीकला के वार्ड क्रमांक 10 संतफलाहारी निवासी सुनील कुमार तिवारी के लिए अपना पक्का मकान किसी सपने से कम नहीं था। मिट्टी से बने दो कमरों के छोटे से मकान में पत्नी और बेटी के साथ जीवन गुजार रहे सुनील के सामने परिवार की जिम्मेदारी भी थी और सीमित आमदनी में घर चलाने की चुनौती भी।
पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी सुनील के कंधों पर आ गई। राजपुरोहित परिवार में जन्मे सुनील लोगों के घरों में पूजा-पाठ कर अपनी आजीविका चलाते हैं। सीमित आमदनी में परिवार का भरण-पोषण करने के साथ बेटी की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे में स्वयं का पक्का मकान बनाना उनके लिए दूर का सपना था।
सुनील बताते हैं कि जब उनके वार्ड में प्रधानमंत्री आवास योजना-1.0 का सर्वे शुरू हुआ, तब उन्हें जानकारी मिली कि सरकार जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए सहायता दे रही है। उन्होंने नगर पंचायत छुरीकला पहुंचकर योजना की जानकारी ली और आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया।
आवेदन के कुछ समय बाद प्रधानमंत्री आवास योजना में उनका नाम स्वीकृत हुआ और उन्हें आवास निर्माण की अनुमति मिली। इसके बाद उनके सपने को हकीकत में बदलने का काम शुरू हुआ। जिस जगह कभी मिट्टी की दीवारों वाला छोटा सा मकान था, वहीं अब उनका पक्का आशियाना खड़ा है।
सुनील कहते हैं, “जिस पक्के मकान को बनाना कभी मेरे लिए सिर्फ एक सपना था, आज उसी मकान में अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून से रह रहा हूं। सरकार की योजना ने मेरे परिवार को सिर्फ मकान नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य दिया है।”
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुनील कुमार तिवारी को कुल 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत के आधार पर सहायता मिली, जिसमें 1.50 लाख रुपये केंद्रांश तथा 0.76 लाख रुपये राज्यांश शामिल है। हितग्राही अंशदान 0.78 लाख रुपये है। आवास का स्वीकृत कारपेट एरिया 29 वर्ग मीटर है।
सुनील कुमार तिवारी प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिले इस सहयोग के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार तथा नगर पंचायत छुरीकला के अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उनके लिए यह आवास केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे जा रहे उस सपने का साकार रूप है, जिसमें उनका परिवार सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन जी सके।

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