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भारतीय वित्तीय संस्थानों में विदेशी शेयरधारकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी सकारात्मक: फिच

नई दिल्ली,एजेंसी। विदेशी शेयरधारकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भारतीय वित्तीय संस्थानों के ऋण खंड के लिए सकारात्मक हो सकती है क्योंकि इससे दीर्घकालिक पूंजी मिलती है और कुछ मामलों में कामकाज के मानकों में सुधार होता है। फिच रेटिंग्स ने मंगलवार को यह बात कही। रेटिंग एजेंसी ने बयान में कहा कि हालांकि, केवल विदेशी रुचि को मजबूत ऋण आधार का विश्वसनीय संकेत नहीं माना जा सकता। वे लेनदेन जो आंतरिक नियंत्रण, जोखिम प्रबंधन एवं नेतृत्व की जवाबदेही को मजबूत करते हैं, केवल वित्तीय लाभ के लिए किए गए सौदों की तुलना में अधिक ऋण-संबंधी महत्व रखते हैं। 

फिच ने कहा कि हाल के समय में विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं, वित्तीय क्षेत्र के नियमन एवं निगरानी तथा बेहतर जोखिम प्रबंधन ढांचे पर उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि निवेशक ऐसे मंच की तलाश करेंगे जिनमें विस्तार योग्य वितरण क्षमता और स्थानीय विशेषज्ञता हो। इसमें कहा, ”विकसित बाजारों का अनुभव रखने वाले अधिग्रहणकर्ता जोखिम नियंत्रण और निगरानी में सुधार ला सकते हैं।” साथ ही प्रतिष्ठित रणनीतिक शेयरधारकों की मौजूदगी पूंजी की लागत को कम करने में सहायक हो सकती है। ये कारक वित्तीय संस्थानों की स्वतंत्र ऋण खंड को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। 

फिच ने बयान में कहा, ”विदेशी शेयरधारकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भारतीय वित्तीय संस्थानों के ऋण खंड के लिए दीर्घकालिक पूंजी और वित्त पोषण लचीलेपन, व्यावसायिक विस्तार तथा कुछ मामलों में कामकाज के मानकों में सुधार के माध्यम से सकारात्मक हो सकती है।” रेंटिंग एजेंसी का मानना है कि बैंकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफआई) में विदेशी शेयरधारकों के नियंत्रण हासिल करने के अधिक आसार हैं क्योंकि नियमों के तहत एनबीएफआई में पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति है। उदाहरण के तौर पर, सुमितोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप ने फुलर्टन इंडिया क्रेडिट कंपनी (अब एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट) का 100 प्रतिशत अधिग्रहण किया जिससे निदेशक मंडल एवं प्रबंधन में प्रतिनिधित्व बढ़ा। साथ ही बिक्री एवं वित्त पोषण में समन्वय भी मिला। 

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