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Mutual Fund उद्योग में सुस्ती, नए निवेशकों की संख्या तीन साल के निचले स्तर पर

मुंबई, एजेंसी। पिछले दो वर्षों से शेयर बाजार में जारी अस्थिरता का असर अब म्युचुअल फंड (एमएफ) की वृद्धि पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार पिछले तीन महीनों से लगातार कम हो रही है और अब यह तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

निवेशकों की संख्या में भारी गिरावट

अप्रैल महीने में उद्योग में लगभग 2,95,000 नए निवेशक जुड़े, यह जून 2023 के बाद सबसे कम है। जो मार्च के 4,71,000 के मुकाबले 37 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। फरवरी में करीब 763,600 निवेशकों ने म्युचुअल फंडों में निवेश शुरू किया था। 

रिटर्न का आकर्षण कम होना

नए निवेशकों की कमी का एक बड़ा कारण इक्विटी फंडों का हालिया खराब प्रदर्शन है। एक्टिव लार्जकैप फंडों ने एक साल में औसतन केवल 0.5% का रिटर्न दिया है। वहीं, स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों का औसत रिटर्न भी लगभग 8.5% के आसपास ही रहा है, जो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई फंड श्रेणियों में स्कीमों के लॉन्च न होने से भी नए निवेशकों तक पहुंच कम हुई है। अप्रैल में केवल एक एक्टिव इक्विटी स्कीम (जियोब्लैकरॉक लार्जकैप फंड) का एनएफओ समाप्त हुआ, जिसने मात्र 30 करोड़ रुपए जुटाए।

अन्य वैश्विक और घरेलू कारक

वैश्विक अनिश्चितता और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण लोग अपनी निवेश योजनाओं को टाल रहे हैं। इसके अलावा, सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी की रफ्तार धीमी होने से भी कीमती धातुओं के ईटीएफ (ETF) और फंड ऑफ फंड्स (FoF) में नए निवेशकों का प्रवाह कम हुआ है।

इन चुनौतियों के बावजूद, अप्रैल 2026 के अंत तक इस उद्योग में कुल 6.17 करोड़ यूनीक निवेशक (पैन पंजीकरण के आधार पर) थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक “छोटा सा झटका” हो सकती है और जैसे ही बाजार के प्रदर्शन में सुधार होगा, वृद्धि फिर से रफ्तार पकड़ सकती है।

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