जन्म: 15.09.1934 निधन: 01.03. 2025
कोरबा ।जीवन अनंत है। एक आता है, तो एक जाता है। ईश्वर को भी इहलोक गमन कर जाना पड़ा था, लेकिन उसी का जीवन सार्थक होता है, जो परिवार के साथ अपनी माटी का भी कर्ज चुकाए और समाज को कुछ देकर जाए। कोरबा के मूर्धन्य समाज सेवी और माँ भारती को समर्पित जीवन जीने वाले पंडित रामगोपाल पाण्डेय का जीवन कोरबा के लिए सेवा की एक पूरी किताब था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में काम करने वाले स्व. श्री पाण्डेय ने कोरबा को अपनी कर्मभूमि बनाया और वनवासियों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को मुख्य धारा में लाने के लिए आरएसएस के माध्यम से नशा से दूर रहने के लिए जागरूकता फैलाने के साथ-साथ उनके बीच जाकर जीवन का लक्ष्य समझाते थे।
हिन्दुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आरएसएस, जनसंघ, जनता पार्टी और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले जिले के अंतिम छोर तक पहुंचे। तब आदिवासियों को बर्गलाकर धर्मांतरण कराया जाता रहा, ऐसे धर्म से बड़ा कुछ नहीं… की सीख आदिवासियों को देते रहे और उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए शासन-प्रशासन तक बातें पहुंचाना, इनकी दिनचर्या में शामिल था। माँ भारती के सपूतों की एक ऐसी टीम थी, जो क्षमता के अनुसार और आरएसएस के राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश के अनुसार आदिवासी गरीब परिवारों तक दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी पहुंचाया करते थे। विश्व हिन्दू परिषद, बीएमएस जैसे संगठनों के लिए काम किया और विश्व की सबसे बड़ी गैर शासकीय शैक्षणिक संस्थान विद्या भारती के लिए उन्होंने जो काम किया, वह कोरबा के लिए अमिट हस्ताक्षर है।
कोरबा जिले में सरस्वती शिशु मंदिर /हॉयर सेकेण्डरी स्कूल का जाल जो बिछा है, वह रामगोपाल पाण्डेय एवं तत्समय की उनकी टीम का ही योगदान है। शिक्षा के माध्यम से बच्चों को श्रेष्ठ से सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए शिक्षा के साथ-साथ संस्कार की पाठशाला सिर्फ सरस्वती शिशु मंदिर/ हायर सेकेण्डरी स्कूलों में ही संभव है। बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ नागरिक बनाना विद्या भारती का सबसे बड़ा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्व. रामगोपाल पाण्डेय के योगदान को कोरबा नहीं भूल सकता। सरस्वती शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सरस्वती शिशु मंदिर की विभिन्न शाखाओं का शुभारंभ किया और विद्या भारती के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को जन सुलभ बनाया और जिले में अधिक से अधिक लोगों तक, यहां तक बीहड़ वनांचल क्षेत्रों तक एकल विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, वनवासी आश्रम, जैसे प्रकल्पों को धरातल पर उतारा।
उन्होंने वनांचल क्षेत्रों में प्रवास कर प्रचारक की भूमिका में कई ऐतिहासिक कार्य किए। खासकर आदिवासियों को नशा मुक्ति अभियान से जोडक़र उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए जो प्रयास किया, वह अतुलनीय और ऐतिहासिक है।
भारतीय जनता पार्टी को कोरबा में स्थाापित करने के लिए स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय, स्व. बंशीलाल महतो, बनवारी लाल अग्रवाल और ऐसे कई दिग्गजों ने जमीनी स्तर पर काम किया और कोरबा जिले में भाजपा का जो विराट स्वरूप दिख रहा है, यह सब ऐसे महामनिषियों की कर्मठता और कर्तव्य परायणता का प्रतिफल है। स्व. श्री पाण्डेय एकीकृत बिलासपुर जिला के समय कोरबा मण्डल अध्यक्ष का भी जिम्मा निभाया।
एक नजर : जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठ भूमि पर
हरदा (म.प्र.) की खिड़किया तहसील के दूरस्थ ग्राम पॅडवा- तारापुर में 15 सितंबर 1934 को जन्मे स्व. श्री रामगोपाल जी पाण्डेय के पिता स्व. भिखाजी पांडेय एक साधारण कृषक थे। स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय ने छिपावड़ जैसी छोटी सी जगह के सरकारी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर 1955 में हाईस्कूल (मेट्रिक) की परीक्षा हाईस्कूल हरदा से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। बचपन से ही मेधावी रहे स्व. श्री रामगोपाल जी ने संसाधनों के अभावों में भी मेट्रिक की परीक्षा गणित, विज्ञान एवं संस्कृत विषयों में विशेेष योग्यता प्राप्त कर पास की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आपकी नियुक्ति डाकतार विभाग के धमतरी (छतीसगढ़) आफिस में सन् 1956 में हुई। 1958 में रायपुर में पदस्थ रहते हुए आपका विवाह 1958 में ही सौ.का. रूक्मिणी पाण्डेय से हुआ जो पांजरा निवासी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाज संगठन के सक्रिय हस्ताक्षर स्व. श्री अमृतलाल मालवीय (ए.डी.आई.एस.) की छोटी बहिन हंै।
सन 1956 से सन 1963 तक डाकतार विभाग में कर्मठ कर्मचारी के रूप में कार्य करते हुए स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय जी ने कुछ नया कर गुजरने की सोच को लेकर शासकीय सेवाओं से त्यागपत्र देकर स्वयं का व्यवसाय शुरू किया तथा आर.एस.एस. से जुडक़र एक सक्रिय स्वयंसेवक के रूप में अपने शेष जीवन को समर्पित किया। इस दौरान आप कई राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर के राजनेताओं के सम्पर्क में आये, जिनमें से श्री कैलाश जोशी (पूर्व मुख्य मंत्री म.प्र.), श्री प्यारेलाल खंडेलवाल, श्री मुरली मनोहर जोशी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे प्रमुख हैं। हिन्दुस्तान समाचार सहित कोरबा के कई ख्यातिलब्ध अखबारों के लिए कार्य करते हुए, संपादक का भी दायित्व निभाया और आपने एक निष्पक्ष एवं निर्विवाद संवाददाता के रूप में अपनी छवि बनाई। कर्मठ जीवन, लोगों के लिए संघर्ष करना, माँ भारती के लिए जेल की हवा खाना और कष्ट सहना, अति पिछड़े हुए एवं जनजाति समुदाय के लिए कार्य करना, हिन्दुत्व की परिभाषा समझाकर समाज में सद्भाव व एकता का पाठ पढ़ाना जैसे सुकृत्य से स्व. श्री रामगोपाल पाण्डेय का जीवन आबाद रहा और वे जी भरकर जिये और जी भर कर माँ भारती की सेवा की। वे कहा करते थे – पुरूषार्थ से धन कमाओ और उसका कुछ अंश समाज को समर्पित करो। यही सीख वे अपने परिवार के साथ समाज को दी और उनका सपना था समृद्ध भारत… समृद्ध कोरबा… समृद्ध वनवासी।
उत्तम से सर्वोत्तम बनने की सीख देते रहे स्व. राम गोपाल पाण्डेय

स्व. श्री राम गोपाल पाण्डेय विद्या भारती के सदस्य एवं सरस्वती शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापक का दायित्व वर्षों तक निभाते रहे। वे बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आजीवन सीख देते रहे और कहते रहे- उत्तम से सर्वोत्तम बनने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए और आजीवन जिसे भी सीख मिले… सीखते रहना चाहिए। उन्होंने पुस्तक को मित्र बनाने की सीख भी देते रहे।
मां भारती के लिए जेल गए, पदलोलुपता से रहे कोसों दूर
हिन्दुवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने वाली संस्था आर.एस.एस. के सक्रिय सदस्य होने के कारण आपने सन 1971 में बांगलादेश आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप आपको जेल जाना पड़ा। सन 1975 के आपातकाल के दौरान भूमिगत रहते हुए भी आपके अंदर छुपा हिन्दुवादी प्रेम आपको जनसंघ, विश्व हिन्दू परिषद, कल्याण आश्रम, कुष्ठ निवारण संघ जैसे सामाजिक व राजनैतिक संगठनों के बैनर तले सामाजिक उत्थान के प्रति सक्रियता कायम रखने में रोक नहीं सका। आपके इस राष्ट्रवादी प्रेम को देख आपातकाल के दौरान जनता पार्टी से विधायक के रूप चुनाव लडऩे हेतू आपके पास प्रस्ताव आया, जिसे आपने यह कहकर ठुकरा दिया कि मंै एक समर्पित कार्यकर्ता हूॅं और अपने वर्तमान कार्य से संतुष्ट हूॅं। आपकी इस निस्वार्थ सेवा भावना को देख सन 1978 में बाबाराव पौराणिक ने आपको तहसील कार्यवाहक बनाया।
सन 1984 से 1994 तक आपने आर.एस.एस. के तहसील संघचालक के पद पर रहते हुए कार्यकत्र्ताओं का कुशल मार्ग दर्शन किया। सरस्वती शिशु मंदिर कोरबा के संस्थापक एवं सन 1969 से लेकर सन 1992 तक व्यवस्थापक के पद पर रहते हुए, आपने सरस्वती शिशु मंदिर का निर्माण करवाया। आपकी हिन्दुवादी विचारधारा ने आपको बाबरी मस्जिद ढांचा ढ़हाने में सहभागिता हेतु प्रेरित किया। जिसके फलस्वरूप दिनांक 06.11.1992 को आपको गिरफ्तार किया गया। ठीक इसी तरह सन 1993 में भी दिल्ली में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में जाते समय आपको गिरफ्तार किया गया। चूंकि निस्वार्थ सेवाभावना आपके अंदर कूट-कूट कर भरी हुई थी। अत: आपने सन 1990 में साडा (विषेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के चेयरमेन के प्रस्ताव को ठुकराते हुए, उसका संचालक सदस्य बनना स्वीकार किया। लंबे समय तक आप 37 ग्रामीण विद्यालयों में अध्यक्ष रहे और निधन तक इसका निर्वहन किया। कोरबा में सर्वब्राहमण समाज के संरक्षक सदस्य रहे। आपका कुशल मार्गदर्शन पाकर रायपुर, जबलपुर, दुर्ग, भोपाल, इटारसी, होशंगाबाद आदि स्थानों में आयोजित स्थानीय श्री गौड़ मालवीय समाज के सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न होते आये हैं।
आप कोरबा (छत्तीसगढ़) में ही अपनी धर्म पत्नी श्रीमती रूक्मिणी पांडेय एवं तीन सुपुत्रों सुनील पाण्डेय, सुबोध पाण्डेय एवं पंकज पाण्डेय के साथ सामाजिक, राजनैतिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आपने सुपुत्रों द्वारा संचालित किराना दुकान एवं निर्माण कार्यो में मार्गदर्शन प्रदान करते रहे। आपकी एक मात्र सुपुत्री श्रीमती सुधा पुरूषोत्तम पारे जी (बी.एच.ई.एल.भोपाल से सेवानिवृत्त ) के संग एक कुशल गृहणी के रूप में भोपाल में सुखमय जीवन निर्वहन कर रही हैं। स्व. श्री रामगोपाल पांडेय एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी रहे। वे शिक्षा के साथ संस्कार की अनिवार्यता को जन-जन तक पहुंचाया और सुखद-समृद्ध भारत का सपना देखा।
सामाजिक सरोकार
स्व. श्री रामगोपाल पांडेय ब्राम्हण समाज के गौरव थे। उन्होंने सामाजिक कुरूतियों के खिलाफ थे और शादी विवाह में फिजूल खर्ची को रोकने के लिए सामुहिक विवाह को बढ़ावा दिया। वे स्थानीय ब्राह्मण समाज ( श्री गौड़) के सक्रिय सदस्य ही नहीं थे अपितु एक सफल राजनीतिज्ञ एवं सफल व्यवसायी भी रहे। कोरबा में रहते हुए भी आप होशंगाबाद, भोपाल, हरदा, इंदौर, इटारसी जैसे सभी स्थानों पर आयोजित समाज के हर कार्यक्रम में न केवल सम्मलित हुए अपितु सक्रिय भूमिका भी निभाते रहे है। भोपाल में निर्मित सत्कार भवन निर्माण में हर संभव सहयोग प्रदान करने वाले रामगोपाल पाण्डेय जी का सामूहिक विवाहों के आयोजनो में भी भरपूर सहयोग रहा। श्री गौड़ मालवीय ब्राहम्णोंत्पत्ति पत्रिका के प्रकाशक की भूमिका निभाई। आपके सामाजिक सरोकार से कोरबा को सेवा की नई परिभाषा मिली।
शिक्षा और संस्कार से समृद्ध और खुशहाल भारत का सपना
स्व.श्रीरामगोपाल पांडेय का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को कोई नहीं भूल सकता। वे शिक्षा और संस्कार के माध्यम से समाज में सत्व का प्रकाश फैलाने के लिए विद्या भारती के बैनर तले अभूत पूर्व कार्य किये। उनका कहना था कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता आती है और संस्कार ही एक ऐसा उपाय है, जिसके जरिये समाज को आदर्श बनाया जा सकता है। संस्कार से ही आपराधिक गतिविधियों में कमी आएगी।
रामगोपाल पाण्डेय का पूरा जीवन एक रोशनी थी
उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, आरएसएस के सर संघ चालक रज्जू भईया, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर जैसे व्यक्तित्वों के साथ काम किया और समाज सेवा के चरम को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। आज स्व. रामगोपाल पाण्डेय समाज सेवा के एक अमिट हस्ताक्षर बन गए।
कोरबा के लिए प्रेरणा थे रामगोपाल जी
शिक्षाविद सूर्य कुमार पांडेय ने कहा कि स्व. पांडेय जी मां भारती के ऐसे सपूत थे, जिन्होंने राष्ट्र जागरण के लिए काम किया। जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि विद्याभारती का जो विराट स्वरूप कोरबा में दिख रहा है, वह पांडेय जी की ही देन है।
