विशेष लेख-गुरूनंदन प्रसाद राजवाड़े (कनकी/कोरबा)
जीवन में माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता। माँ प्रकृति प्रदत्त जीवन की अमूल्य धरोहर है। हम जीवन में कितनो भी सफल हो जाएं, लेकिन माँ की बराबरी नहीं कर सकते। माँ है तो जीवन की सारी खुशियां होती हैं। माँ पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे प्रिय और प्यार का अटूट विश्वास है। ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं, जिसकी कलम माँ की महिमा लिख सके। माँ एहसास है और एहसास सिर्फ अनुभव कर ही प्राप्त किया जा सकता है। सनातन काल से अब तक हुए देवपुरूष एवं कवियों ने माँ की महिमा का गुणगान किया, लेकिन वह संपूर्ण नहीं। माँ पर हम जितनी भी कविता या लेख लिख लें, वह कभी सम्पूर्ण नहीं होता। सम्पूर्ण सिर्फ माँ होती है, न कविता सम्पूर्ण होती है और न ही लेख।

मातृ दिवस पर माँ द्वारा उड़ेले गए दुलार का बखान करने का ही समय नहीं है, संकल्प लेने का भी समय है, कि हम चाहे युवा हो, माँ चाहे बुजूर्ग हो, हर समय उसका ख्याल मन में हो और उसकी हमेशा पूछ परख और ख्याल रखें। माँ ईश्वर तो नहीं, लेकिन ईश्वर से कम भी नहीं।
माँ वह रामायण है, जो जीवन के सुख-दुख में हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। हर संकट को झेलती है और हमें हर संकट से बचाती है। माँ अभिलेख है और हम इस अभिलेख का एक पन्ना। माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। माँ जीवन का स्वर्णीम एहसास है और माँ के कदमों में ही स्वर्ग है। माँ का हमेशा ध्यान रखो। माँ जब तक है, उससे बढ़ कर कोई नहीं। जिन्दगी आती-जाती है, लेकिन माँ सदैव अमर और अखण्ड है। हमारे ऋषि-महर्षियों ने माँ को भगवान से भी ऊपर रखा है, क्योंकि माँ के कारण ही हम ईश्वर को जान पाए और ईश्वर से पहले माँ इस धरती पर आई। माँ के जाने के बाद भी वह हमेशा अपनी संतानों के प्रति चिंतित रहती है और उसका एहसास ही हमें जीवन जीने के लिए प्रेरणा देता है।
जब तक माँ इस दुनिया में है, कभी उसकी उपेक्षा मत करना, क्योंकि माँ से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं। माँ हमारे जीवन का आधार है। माँ है तो घर स्वर्ग है और स्वर्ग में जीवन की खुशियां। छोटी-छोटी खुशियों से हमें बड़ा करने वाली माँ को अंतिम समय में भी आप छोटी-छोटी खुशियों से उसके जीवन को आबाद रखें। माँ की ख्वाहिश ज्यादा नहीं होती, उसे सिर्फ बच्चों का प्यार चाहिए, क्योंकि माँ के लिए बच्चे ही उनका संसार होता है और हमें भी एहसास होना चाहिए कि माँ ही हमारा संसार है।
