श्री निकुंज आश्रम जजंगिरी के पंडित नारायण महाराज करेंगे कथा वाचन, भागवत पुराण कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायक- गोविंद वैष्णव

कोरबा/पाली। श्रीमद्भागवत को भगवान श्रीकृष्ण का साहित्यिक अवतार माना गया है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आध्यात्मिक विकास और भगवान के प्रति गहरी आसक्ति आती है। इसी उद्देश्य के साथ क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी कमल वैष्णव पिता गोविंद वैष्णव के निवास स्थान शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, वार्ड क्रमांक- 08 में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 08 अप्रैल से रखा गया है। जिसके कथावाचक श्री निकुंज आश्रम, जजंगिरी भिलाई- 03, जिला- दुर्ग निवासी पंडित नारायण महाराज होंगे। भागवत कथा महापुराण के आयोजक वैष्णव परिवार ने बताया कि 08 अप्रैल को प्रारंभ होने वाले श्रीमद्भागवत कथा का समापन 15 अप्रैल को होगा। जहां प्रथम दिन सुबह 9 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी। जिस हेतु वैदिक मंत्रोच्चार के बाद कार्यकम स्थल पर एकत्रित महिलाएं कलश लेकर प्राचीन शिवमंदिर के सामने स्थित नौकोनिया तालाब पहुँचेगी। यहां पंडित श्री नारायण द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ कलश में जल भराया जाएगा। इसके बाद महिलाएं सिर पर कलश लेकर नगर का भ्रमण करते हुए पुन: कार्यक्रम स्थल तक पहुँचेंगी। जिसके बाद देवी- देवताओं की पूजा एवं दोपहर 02 बजे से भागवत कथा प्रारंभ होगी। जो नित्य सुबह दैनिक पूजा एवं दोपहर 02 बजे से भागवत कथा का आयोजन 14 अप्रैल तक किया जाएगा। वहीं 15 अप्रैल को सामूहिक पूर्ण आहुति, हवन, ब्राह्मण भोज, कन्या भोज, कुटुंब भोज, महाप्रसाद का वितरण एवं कलश का वितरण किया जाएगा।
श्रीमद्भागवत कथा को लेकर इसके आयोजक गोविंद वैष्णव ने कहा कि यह कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायक है तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है। श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवद् पुराण को मुक्ति ग्रन्थ भी कहा गया है। इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित कराना चाहिए। इसके अलावा रोग- शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए भी इसका आयोजन किया जाता है। उन्होंने नगर सहित आसपास क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में शामिल हो भगवान बांके बिहारी श्री कृष्ण के विविध कथा प्रसंग का लाभ लेने अपील की है।
