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सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, नए साल की शुरुआत तक इतने हो सकते हैं दाम

मुंबई, एजेंसी। देशभर में धनतेरस के साथ फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है और बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। इसी बीच सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी ने ग्राहकों को चौंका दिया है। सर्राफा बाजार में रिकॉर्ड तोड़ कीमतों पर गहनों की खरीदारी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिवाली और 2026 की शुरुआत तक दाम और बढ़ सकते हैं।

कीमतों में और वृद्धि की संभावना

इस बार धनतेरस पर सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार, 20 अक्टूबर यानी दिवाली के दिन इनकी कीमतों में और वृद्धि की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी की कीमतें 2 लाख रुपये प्रति किलो और सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है।

2026 की शुरुआत तक और तेजी संभव

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सोने की कीमतें 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में और अधिक बढ़ सकती हैं। इसके पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं, जैसे –

– रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना

– वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी

– त्योहारों और शादियों के मौसम में घरेलू मांग में तेजी

2025 के आखिरी महीनों में सोने की कीमतें

विश्लेषकों का मानना है कि साल 2025 के आखिरी महीनों में सोने की कीमतें 1,20,000 रुपये से 1,35,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती हैं। अगर रुपये में और गिरावट आई तथा वैश्विक कीमतों में तेजी जारी रही, तो 2026 की पहली छमाही में यह दाम 1,30,000 रुपये से 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकते हैं।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

रिपोर्ट के अनुसार, आगामी महीनों में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 87 से 89 के बीच पहुंच सकती है, जिससे आयातित सोना और महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में निवेशकों की बढ़ती रुचि, और चीन व जापान से आ रही भारी मांग भी कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण बन रही है।

अखिल भारतीय रत्न और आभूषण परिषद (GJC) के संस्थापक सदस्य और पूर्व प्रमुख अनंथा पद्मनाभन ने बताया कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतें 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को भी पार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह तेजी केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और एशियाई देशों में मांग के चलते देखने को मिल रही है।

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