कोरबा। “जन संघर्षों को संगठित किये बिना संगठन का निर्माण नहीं किया जा सकता और बिना संघर्ष के संगठन भी नहीं बनाया जा सकता। संगठन जितना मजबूत होगा, जन संघर्षों का विस्तार भी उतनी ही तेजी से होगा। जिले में किसान सभा को मजबूत करने की यही कुंजी है। यही वह रास्ता है, जिसके जरिए भूविस्थापितों और गरीब किसानों की आवाज सड़क से उच्च सदन तक पहुंचाई जा सकती है।” ये बातें किसान सभा के चौथे कोरबा जिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य महासचिव कपिल पैकरा ने कही।

किसान सभा के राज्य संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आज कोरबा के भूविस्थापित गरीब किसान जिस चक्की में पिस रही है, उसके खिलाफ पूरे प्रदेश के भू विस्थापितों को एक मंच पर आकर लड़ने के लिए योजनाबद्ध ढंग से संघर्ष विकसित करने की जरूरत है। भूविस्थापन, मनरेगा, आदिवासियों पर दमन आदि जिन मुद्दों को हमने चिन्हित किया है, इनमें से हर समस्या राज्य और अखिल भारतीय मुद्दे से जुड़ती है। इसलिए इन स्थानीय मुद्दों पर आयोजित संघर्षों की धमक दूर तक जाती हैं। उन्होंने इन मुद्दों पर संघर्षों को निरंतरता मे आयोजित करने और उसे सकारात्मक नतीजों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में 108 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जिला सचिव दीपक साहू ने संगठन के कामकाज की रिपोर्ट रखी, जिसे प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से पारित किया। सम्मेलन ने खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों के साथ एसईसीएल में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापितों को रोजगार और पुनर्वास देने, हसदेव जंगल का विनाश रोकने, अनाप शनाप बिजली बिलों की वसूली और स्मार्ट मीटर परियोजना पर रोक लगाने, आदि के संबंध में प्रस्ताव पारित किया।
सम्मेलन में 23 सदस्यीय जिला समिति का चुनाव किया गया, जिसके जिला अध्यक्ष जय नारायण कौशिक ; उपाध्यक्ष : हेम सिंह मरकाम,राजकुमारी बिंझवार,रामायण कंवर; सचिव दीपक साहू, सहसचिव : सुकृता,उत्तम दास कोषाध्यक्ष: दामोदर श्याम तथा कार्यकारिणी सदस्य : प्रशांत झा,जवाहर सिंह कंवर,मंगल सिंह राठिया,बृजलाल पंडो ,सकुंती,गंगोत्री,देव कुंवर,रेशम,गणेश चौहान,इंदर,पवन यादव निर्वाचित हुए।
राज्य महासचिव कपिल पैकरा के संबोधन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने देशव्यापी किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कोरबा जिले में किसानों की स्थानीय समस्याओं और ग्रामीण जन जीवन के रोजमर्रा के मुद्दों पर संघर्षों को विकसित करने पर जोर दिया तथा इसके लिए “हर गांव में किसान सभा और किसान सभा में हर किसान” के नारे को लागू करने पर जोर दिया। जिला सम्मेलन में सूरजपुर में होने वाले राज्य सम्मेलन के लिए 23 प्रतिनिधियों का भी चुनाव किया गया।
