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तलत अजीज बोले- उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन परसों हुआ:परिवार ने आज पुष्टि की, 73 साल की उम्र में सैन फ्रांसिस्को में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली,एजेंसी। विश्वविख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर रविवार रात से आ रही थी, लेकिन सोमवार सुबह परिवार ने इसकी पुष्टि की। वे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से जूझ रहे थे और दो हफ्ते से सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती थे।

इधर सिंगर तलत अजीज ने बताया है कि उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन परसों, यानी 14 दिसंबर को ही हो गया था। परिवार ने यह बात छिपाए रखी। उनके भाई बीती रात अमेरिका के लिए रवाना हुए हैं। वहीं 18 दिसंबर को जाकिर हुसैन को सुपुर्दे-ए-खाक किया जा सकता है।

रविवार देर रात निधन की अफवाह उड़ी थी

रविवार देर रात भी उनके निधन की खबर आई थी। भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी निधन संबंधी पोस्ट शेयर की थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था। इसके बाद जाकिर की बहन और भांजे आमिर ने जाकिर के निधन की खबर को गलत बताया था।

उस्ताद जाकिर हुसैन को 2023 में पद्म विभूषण सम्मान मिला

उस्ताद जाकिर हुसैन को 1988 में पद्मश्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2009 में पहला ग्रैमी अवॉर्ड मिला था। 2024 में उन्होंने 3 अलग-अलग एल्बम के लिए 3 ग्रैमी भी जीते।

9 मार्च 1951 को मुंबई में जन्मे उस्ताद जाकिर हुसैन ने सिर्फ 11 साल की उम्र में अमेरिका में पहला कॉन्सर्ट किया था। 1973 में उन्होंने अपना पहला एल्बम ‘लिविंग इन द मटेरियल वर्ल्ड’ लॉन्च किया था। उस्ताद को 2009 में पहला ग्रैमी अवॉर्ड मिला। 2024 में उन्होंने 3 अलग-अलग ऐल्बम के लिए 3 ग्रैमी जीते। इस तरह जाकिर हुसैन ने कुल 4 ग्रैमी अवॉर्ड अपने नाम किए।

उनके पिता का नाम उस्ताद अल्लारक्खा कुरैशी और मां का नाम बावी बेगम था। उस्ताद अल्लारक्खा अपने समय के बेहद प्रसिद्ध तबला वादक थे। उन्होंने ही जाकिर को संगीत की शुरुआती तालीम दी। जाकिर हुसैन की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के माहिम स्थित सेंट माइकल स्कूल से हुई थी। उन्होंने ग्रेजुएशन मुंबई के ही सेंट जेवियर्स कॉलेज से किया था।

सपाट जगह देखकर उंगलियों से धुन बजाने लगते थे जाकिर हुसैन के अंदर बचपन से ही धुन बजाने का हुनर था। वे कोई भी सपाट जगह देखकर उंगलियों से धुन बजाने लगते थे। यहां तक कि किचन में बर्तनों को भी नहीं छोड़ते थे। तवा, हांडी और थाली, जो भी मिलता, वे उस पर हाथ फेरने लगते थे।

उस्ताद जाकिर हुसैन 7 बार ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुए थे, 4 बार पुरस्कार जीता।

उस्ताद जाकिर हुसैन 7 बार ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुए थे, 4 बार पुरस्कार जीता।

​​​​​तबले को अपनी गोद में रखते थे जाकिर हुसैन शुरुआती दिनों में उस्ताद जाकिर हुसैन ट्रेन में यात्रा करते थे। पैसों की कमी की वजह से जनरल कोच में चढ़ जाते थे। सीट न मिलने पर फर्श पर अखबार बिछाकर सो जाते थे। तबले पर किसी का पैर न लगे, इसलिए उसे अपनी गोद में लेकर सो जाते थे।

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