बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पीपी साहू ने कहा है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार तहसीलदार को नहीं, बल्कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM को है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारी के समक्ष नया आवेदन पेश करने को कहा है।
दरअसल, बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी शैली सोनकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ही सक्षम प्राधिकारी हैं।
साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता ने कहा- तहसीलदार को दी थी आवेदन
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलदार बिलासपुर के पास आवेदन किया था। तहसीलदार ने इस पर मामला दर्ज कर प्रक्रिया शुरू भी की, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी के पास आवेदन करें याचिकाकर्ता
मामले में दिए गए आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 और राज्य सरकार के 24 सितंबर 2013 के सर्कुलर के तहत जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पास है।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी गई है कि वे 30 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारी के पास नया आवेदन जमा कर सकती हैं। आवेदन पेश करने पर सक्षम अधिकारी को नियम और कानून के तहत उस पर जल्द से जल्द विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
