कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पुराने भवन के अलावा परिसर में स्थित ट्रामा सेंटर भवन में चिकित्सा विभाग खोले गए हैं। दोनों भवन के बीच आवाजाही करने वाले मरीज व उनके परिजन शेड नहीं होने से मौसम की मार झेलते हैं। ऐसे में अब अस्पताल परिसर में दोनोंे भवन के बीच शेड का निर्माण कर मरीजों व उनके परिजन को राहत दिलाई जाएगी।
मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल बनने के बाद से जिला अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं और मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। एनएमसी के गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अस्पताल में लगातार सुविधाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में अस्पताल में बेड संख्या बढ़ाने व चिकित्सा विभाग के लिए जगह की कमी होने पर परिसर में स्थित ट्रामा सेंटर भवन का उपयोग शुरू किया गया। जहां अब अस्थि रोग विभाग के ओपीडी व आईपीडी के अलावा शिशु वार्ड, कैंसर विभाग समेत कई अन्य विभाग संचालित हो रहे हैं। इस कारण अस्पताल के पुराने भवन से रजिस्ट्रेशन कराकर मरीज व उनके परिजन उक्त विभाग में इलाज के लिए ट्रामा सेंटर भवन पहुंचते हैं। इसके अलावा ट्रामा सेंटर भवन से एक्स-रे, सोनोग्राफी समेत पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए मरीज व उनके परिजनों की आवाजाही होती है। दोनों भवन के बीच की दूरी करीब 10 मीटर और खुले आसमान के नीचे होने से मरीज व उनके परिजन को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। ठंड के सीजन में भले ही राहत मिलता है लेकिन गर्मी में धूप तो बारिश के सीजन में पानी गिरने पर भीगकर आवाजाही करनी पड़ती है। लेकिन अब जल्द ही दोनों भवनों के बीच शेड का निर्माण किया जाएगा।
मरीजों को शिफ्ट करने में भी होती है काफी परेशानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का कैजुअल्टी पुराने भवन के साथ बने कंपोजिट बिल्डिंग में संचालित है। कई केस वहां पहुंचने के बाद प्राथमिक उपचार करके ट्रामा सेंटर भवन में संचाालित विभाग के आईपीडी में शिफ्ट की जाती है। गर्मी और बारिश में मरीजों की शिफ्टिंग के दौरान परेशानी होती है। बारिश के दिनों में तो लगातार पानी गिरने पर एंबुलेंस बुलाकर मरीज को इलाज व जांच के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक ले जाना पड़ता है। गर्मी में चिलचिलाती धूप के बीच मरीजों को शिफ्ट किया जाता है।
^मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविकांत जाटवर के मुताबिक अस्पताल परिसर में पुराने भवन व ट्रामा सेंटर के बीच खुले में आवाजाही से मरीजों व उनके परिजन को हो रही परेशानी को देखते हुए उक्त दूरी के बीच शेड बनाया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव को स्वीकृति मिल चुकी है।

