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गूंज उठा ढपढप: “जय श्री राम” के जयघोष में डूबा कोयलांचल, सुंदरकांड पाठ ने रचा भक्ति का विराट इतिहास

कोरबा/बांकी मोंगरा (ढपढप)। कोयलांचल क्षेत्र का बांकी मोंगरा स्थित ढपढप मैदान इन दिनों अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है, जहां आस्था मानो ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ी है। विश्व प्रसिद्ध बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से प्रवाहित दिव्य श्री हनुमंत कथा के दौरान हजारों-लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया है।

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में आयोजित सामूहिक सुंदरकांड पाठ ने पूरे वातावरण को राममय और भक्तिमय बना दिया। जैसे ही चौपाइयों की गूंज उठी, पूरा क्षेत्र “जय श्री राम” और “जय बागेश्वर धाम” के जयघोष से थर्रा उठा।

पीतांबरी आस्था का अनुपम दृश्य

कथा के इस विशेष दिवस पर ढपढप मैदान एक अलग ही रंग में नजर आया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पीले वस्त्रों में सजे-धजे पहुंचे, जिससे पूरा पंडाल पीतांबरी आस्था में रंग गया। पीला रंग जहां शुभता और समर्पण का प्रतीक है, वहीं इतनी विशाल संख्या में एकरूपता ने ऐसा आभास कराया मानो स्वर्णिम भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही हो।
संगीतमय सुंदरकांड से झूम उठा जनसागर

कार्यक्रम की शुरुआत संगीतमय सुंदरकांड पाठ से हुई। ढोल-मंजीरों की मधुर थाप और भजनों की स्वर लहरियों के बीच जब चौपाइयों का पाठ हुआ, तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। हर कोई भक्ति के सागर में डूबा नजर आया।
भीड़ का ऐसा सैलाब कि मैदान पड़ा छोटा

ढपढप का विशाल मैदान भी श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने छोटा प्रतीत होने लगा। चारों ओर सिर्फ सिर ही सिर नजर आ रहे थे। विशेष रूप से महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
भावविभोर हुए श्रद्धालु, हर मन में हनुमान

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सहज, सरल और ओजस्वी शैली ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। हनुमान जी के प्रति उनकी अटूट भक्ति और कथा के माध्यम से जीवन के गूढ़ संदेशों ने श्रद्धालुओं के हृदय को छू लिया।
“सुंदरकांड केवल पाठ नहीं, जीवन का समाधान”

कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा कि सुंदरकांड केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की हर समस्या का समाधान है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के मार्ग पर चलने, संयम और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी।
प्रशासन भी रहा सतर्क, व्यवस्था चाक-चौबंद

इतनी विशाल भीड़ के बावजूद प्रशासन की व्यवस्था सराहनीय रही। सुरक्षा से लेकर यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

मुख्य बिंदु
स्थान: ढपढप मैदान, बांकी मोंगरा (कोरबा)
मुख्य वक्ता: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम)
आयोजन: दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं सामूहिक सुंदरकांड पाठ
विशेषता: हजारों महिलाओं सहित विशाल जनसैलाब की उपस्थिति
मुख्य आकर्षण: संगीतमय सुंदरकांड और गूंजते जयघोष
ढपढप का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल बन गया है। यहां उमड़ा जनसैलाब यह बता रहा है कि भक्ति की शक्ति आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही प्रबल है, जितनी सदियों पहले थी।

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