मुंबई, एजेंसी। भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार के लिए यह एक कमजोर प्रदर्शन का दौर साबित हो रहा है। हाल के महीनों में बाजार में आई गिरावट के चलते देश की कई बड़ी कंपनियों के मार्केट कैप में तेज कमी देखी गई है, जिसका असर उनकी वैश्विक रैंकिंग पर भी पड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बाजार पूंजीकरण के आधार पर दुनिया की शीर्ष 100 सूचीबद्ध कंपनियों में अब किसी भी भारतीय कंपनी का नाम शामिल नहीं है। साल 2025 की शुरुआत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियां इस सूची में मौजूद थीं लेकिन अब ये सभी बाहर हो चुकी हैं।

रिलायंस की रैकिंग 73 से 106 हुई
रिलायंस इंडस्ट्रीज 2025 की शुरुआत में वैश्विक रैंकिंग में 57वें और 2026 की शुरुआत में 73वें स्थान पर थी। अब यह फिसलकर सीधे 106वें स्थान पर पहुंच गई है। देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक की हालत और भी खराब हुई है। बैंक 2025 की शुरुआत में 97वें स्थान पर था जो आज लुढ़ककर सीधे 190वें पायदान पर जा गिरा है। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टीसीएस (TCS) की वैश्विक रैंकिंग में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। साल 2025 की शुरुआत में 84वें और 2026 की शुरुआत में 171वें स्थान पर रहने वाली टीसीएस अब फिसलकर सीधे 314वें स्थान पर पहुंच गई है।
भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) 2025 की शुरुआत में 198वें और 2026 की शुरुआत में 330वें स्थान पर थी लेकिन अब यह बेहद नीचे 590वें स्थान पर पहुंच चुकी है।
एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईटीसी लिमिटेड (ITC) भी 2025 और 2026 की शुरुआत में क्रमशः 296वें और 466वें स्थान से फिसलकर अब 702वें स्थान पर आ गई है।
बैंकिंग और टेलीकॉम की भी बिगड़ी चाल
दिक्कत सिर्फ टॉप-100 तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक टॉप-500 कंपनियों की सूची में भी भारत की स्थिति में गिरावट देखी जा रही है। बाजार पूंजीकरण के आधार पर इस सूची में भारतीय कंपनियों की संख्या घटकर अब करीब 9 रह गई है, जबकि 2026 की शुरुआत में यह संख्या 13 और 2025 की शुरुआत में 15 थी।
भारती एयरटेल की रैंकिंग 164वें स्थान से फिसलकर 202वें स्थान पर पहुंच गई है। इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की स्थिति में भी गिरावट दर्ज की गई है, और वे क्रमशः 274वें और 276वें स्थान पर आ गए हैं, जबकि पहले ये लगभग 215वें और 231वें स्थान पर थे।
रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में कमजोरी के चलते भारत में 100 अरब डॉलर से अधिक बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों की संख्या भी घटकर केवल तीन रह गई है। पहले इस श्रेणी में छह कंपनियां शामिल थीं, लेकिन अब इसमें केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल ही बची हैं। इसी दबाव के कारण आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और टीसीएस इस 100 अरब डॉलर क्लब से बाहर हो गई हैं।
क्यों डूब रहा है भारतीय बाजार?
- मिडिल ईस्ट संकट
- ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज के डाउनग्रेड की बाढ़
- बढ़ता अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- AI और टेक बूम की कमी
