कोरबा। भू-विस्थापितों के बार-बार किए जा रहे आंदोलन से एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। दूसरे दिन मंगलवार को माटी मंच ने एसईसीएल कुसमुंडा जीएम दफ्तर के मुख्य गेट पर धरना दिया। इस धरना को श्रम सेवा भू-विस्थापित कामगार संगठन ने समर्थन दिया। 10 सूत्रीय मांग पत्र पर त्रिपक्षीय वार्ता होगी। इस लिखित आश्वासन पर भू-विस्थापितों ने शाम 4 बजे धरना समाप्त कर दिया।
मंगलवार के दिन जीएम दफ्तर कुसमुंडा के बाहर गहमागहमी का माहौल रहा। इसकी वजह भू-विस्थापितों का धरना व गेट जाम आंदोलन रहा। सोमवार से जारी खदान प्रभावित कुछ गांवों की महिलाओं का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। बारिश में भीगते हुए भी प्रदर्शनकारी आंदोलन स्थल पर डटे रहे। इधर, कुसमुंडा खदान में नियोजित एक निजी कंपनी के चालकों ने हर महीने पीएफ राशि खाते में जमा नहीं होने का आरोप लगाते हुए भू-विस्थापितों के आंदोलन के साथ खड़े नजर आए। लगभग 7 घंटे जीएम दफ्तर के मुख्य गेट को बंद कर भू-विस्थापितों ने धरना दिया। जमीन अर्जन के बदले एसईसीएल में कोल इंडिया की लागू नई पॉलिसी के तहत नौकरी देने की व्यवस्था से छोटे खातेदार छूट रहे हैं।
दूसरी ओर रोजगार के कई पुराने मामले भी पेंडिंग हैं। इस पर रोजगार पाने एसईसीएल कुसमुंडा में भू-विस्थापित परिवार के सदस्यों ने नामांकन भरा है। एरिया व मुख्यालय दफ्तर में फाइल प्रक्रियाधीन है। भू-विस्थापित रोजगार के इन प्रकरणों को वनटाइम सेटलमेंट से निपटारा करने की मांग करते आ रहे हैं।
भू-विस्थापितों ने बताया कि एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन ने 10 सूत्रीय मांग पत्र पर 15 से 20 सितंबर के बीच त्रिपक्षीय वार्ता कराने पर सहमति दी है। इसके बाद गेट जाम और धरना समाप्त किया है। प्रबंधन ने लिखित में सहमति पत्र दिया है, जिसमें प्रबंधन प्रतिनिधि के साथ ही संगठन प्रतिनिधि के हस्ताक्षर हैं। भू-विस्थापितों के हित से जुड़ी मांगपत्र में पुराने जमीन अर्जन के प्रकरण में नौकरी, पुनर्वास स्थल पर आवंटित प्लाट का स्थायी पट्टा समेत अन्य मांगें शामिल हैं।

